विनय सिंह बैस, नई दिल्ली। भारत की नरेंद्र मोदी सरकार पर भारत के राष्ट्रीय चिह्न के साथ छेड़छाड़ और अनादर करने का आरोप लग रहा है। विपक्ष  और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जिस राष्ट्रीय चिह्न का अनावरण किया था, उसके शेर गुर्रा रहे हैं जबकि सारनाथ के अशोक स्तंभ में शेर संयमित और शांत है। बता दें कि सारनाथ में ही महात्मा बुद्ध ने पहला उपदेश दिया और मौर्य वंश के शासक ने यहीं यह स्तंभ स्थापित किया था। 26 जनवरी 1950 को इसी अशोक स्तंभ को भारत के राष्ट्रीय चिह्न के रूप में स्वीकार किया गया था। सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन की छत पर 6.5 मीटर ऊंचा राष्ट्रीय चिह्न का अनावरण किया था। इसे बनाने में 9,500  किलो तांबा लगा है।

विवाद संख्या -1:- अशोक स्तंभ का उद्घाटन लोकसभा के स्पीकर को करना चाहिए था न कि प्रधानमंत्री को। क्योंकि संसद का सर्वेसर्वा स्पीकर होता है, प्रधानमंत्री नहीं।
स्पष्टीकरण :- यह बिल्कुल सत्य है कि किसी भी सदन के अंदर उस सदन का अध्यक्ष ही सभा का सर्वेसर्वा होता है। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर और राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान सभापति (उपराष्ट्रपति) सर्वेसर्वा होते हैं। संसद के सभी सदस्य, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी स्पीकर और सभापति के अधीन होते हैं और उन्हें अध्यक्ष महोदय या सभापति महोदय कहकर ही संबोधित करते हैं।

लेकिन नई संसद भवन अभी निर्माणाधीन है और संसद भवन का निर्माण कार्य भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसलिए जब तक संसद भवन स्पीकर को सौंप नहीं दिया जाता है, तब तक उसका उद्घाटन सरकार के प्रतिनिधि (प्रधानमंत्री) द्वारा करने में कोई संवैधानिक बुराई नहीं है।

ashok stamvhविवाद संख्या -2:- संसद भवन में उद्घाटन किए गए अशोक स्तंभ के शेर आक्रामक हैं, वे डराते हैं। जबकि वास्तविक अशोक स्तंभ के शेर सौम्य और शालीन हैं।
स्पष्टीकरण : पहली बात तो यह कि दोनों की तुलना करना ही ठीक नहीं है क्योंकि 1905 में सारनाथ की खुदाई के दौरान सिविल इंजीनियर ऑस्कर को प्राप्त हुए अशोक स्तंभ की ऊंचाई महज 7 फीट है और संसद भवन के अशोक स्तंभ की ऊंचाई लगभग 20 फीट, वजन लगभग 9500 किलो है यानि कि उससे लंबाई में लगभग तीन गुना बड़ा और काफी विशाल है। जब आकृति लंबी और विशाल होगी तो उसके शरीर के सभी अंग भी उसी अनुपात में बड़े होंगे और जाहिर सी बात है, मुंह भी बड़ा ही होगा।

दूसरी बात यह कि वाराणसी के सारनाथ में रखा हुआ अशोक स्तंभ जमीन पर रखा है। उसे हम समानांतर देखते हैं जबकि नए संसद भवन में स्थापित किया गया अशोक स्तंभ भूमि तल से लगभग 108 फीट की ऊंचाई पर है। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सारनाथ के संग्रहालय में रखे हुए अशोक स्तंभ के शेर भी आक्रामक और दहाड़ते हुए ही दिखते हैं। शांत और सौम्य शेर वाला अशोक स्तंभ सेकुलर विचारधारा के लोगों के दिमाग की उपज लगती है। तथा – मेरा व्यक्तिगत विचार यह है कि शेर साहस और शौर्य के प्रतीक माने जाते हैं इसलिए नए और दबंग भारत के प्रतीक अशोक स्तंभ के शेर आक्रामक और दहाड़ते हुए ही अच्छे लगते हैं। शांत और सौम्य तो बकरियां भी होती हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं।

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