कोलकाता | 6 फरवरी 2026: कांग्रेस ने 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा और साफ राजनीतिक फैसला लिया है। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि वह राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और न तो सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के साथ और न ही तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी तरह का सीट-साझाकरण या गठबंधन करेगी।
यह अहम फैसला नई दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में लिया गया। बैठक में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व मौजूद था।
दिल्ली में हुआ फैसला, खड़गे के आवास पर बैठक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई इस बैठक में पश्चिम बंगाल से—

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वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुवंकर सरकार
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पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पांच बार के पूर्व लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी
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पश्चिम बंगाल से कांग्रेस की एकमात्र लोकसभा सांसद ईशा खान चौधरी शामिल हुए।
बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने तय किया है कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव बिना किसी गठबंधन के लड़ेगी।
गुलाम अहमद मीर का बयान
मीर ने कहा, “पश्चिम बंगाल में गठबंधन और सीट बंटवारे के हमारे पिछले अनुभवों ने जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कमजोर किया है। राज्य नेतृत्व से व्यापक चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है कि कांग्रेस सभी 294 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी और उसी अनुसार तैयारी शुरू की जाएगी।”
राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल भी बैठक में मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस के शीर्ष नेता— लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल थे, जिससे यह साफ हो गया कि यह फैसला केवल राज्य इकाई का नहीं बल्कि हाई कमान का रणनीतिक निर्णय है।
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “यह पार्टी हाई कमान का निर्णय है। कांग्रेस इस बार पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी।”
गठबंधन क्यों टूटा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के चुनावों के लिए कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच सीट बंटवारे की संभावना पहले से ही कमजोर थी।
2016 के बाद कांग्रेस-वाम गठबंधन के दो मुख्य स्तंभ—
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दिवंगत सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी
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अधीर रंजन चौधरी माने जाते थे।
सीताराम येचुरी के निधन के बाद सीपीआई (एम) के केंद्रीय नेतृत्व में ऐसा कोई राष्ट्रीय चेहरा नहीं बचा, जो कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में प्रभावी ढंग से पैरवी कर सके।
2026 चुनाव से पहले बदली रणनीति
कांग्रेस का यह फैसला साफ संकेत देता है कि पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक मजबूती को फिर से खड़ा करने की कोशिश में है। अब देखना होगा कि यह रणनीति तृणमूल कांग्रेस और वाम मोर्चे के लिए कितनी चुनौती बनती है।
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