नई दिल्ली । भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने परिवारवादी पार्टियों को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा है। नड्डा ने कश्मीर से धारा 370 को हटाने के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस के विरोध का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अब न तो राष्ट्रीय रह गई है,न भारतीय और न ही प्रजातांत्रिक रह गई है बल्कि अब ये भी भाई-बहन की पार्टी बनकर ही रह गई है। नई दिल्ली में वंशवादी राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक शासन को खतरा विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि देश में विचारधारा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने वाली एकमात्र पार्टी भाजपा ही रह गई है। इसने कश्मीर को लेकर 1951 में ही यह कहा था कि एक देश में दो निशान, दो विधान दो संविधान नहीं चलेंगे।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए नड्डा ने कहा कि जिस धारा 370 को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि यह अस्थायी है और घिसते-घिसते घिस जाएगा, जब उस 370 को हटाने का समय आया तो उसी कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा में इसका विरोध किया क्योंकि वो देश को भूल गए थे और उन्हे सिर्फ जम्मू-कश्मीर का ही एंगल दिखाई दे रहा था। नड्डा ने परिवारवादी पार्टियों को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस भी अब केवल भाई-बहन की पार्टी बनकर ही रह गई है। इसलिए वहां कभी जी-23 खड़ा हो जाता है तो कभी जी-22 या जी-21। नड्डा ने कांग्रेस के साथ-साथ परिवाद को लेकर क्षेत्रीय पार्टियों पर भी निशाना साधा।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जम्मू कश्मीर के पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस, पंजाब के शिरोमणि अकाली दल, हरियाणा के आईएनएलडी, उत्तर प्रदेश के समाजवादी पार्टी, बिहार के राजद, पश्चिम बंगाल के टीएमसी, झारखंड के जेएमएम, उड़ीसा के बीजू जनता दल, आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कांग्रेस, तेलंगाना के टीआरएस, तमिलनाडु के करुणानिधि परिवार, महाराष्ट्र के शिवसेना और एनसीपी, कर्नाटक के जेडीएस सहित कई अन्य क्षेत्रीय दलों और उनके नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रीय पार्टियों पर धीरे-धीरे कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। अब इन क्षेत्रीय पाटीर्यों में विचारधारा किनारे हो गई और परिवार सामने आ गए। इस तरह से क्षेत्रीय पाटीर्यां, परिवारवादी पार्टियों में बदल गई हैं।

क्षेत्रीय दलों को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए नड्डा ने कहा कि इन रीजनल पार्टियों को किसी भी तरह से सत्ता में आना होता है इसलिए ये राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को ताक पर रख कर केवल सत्ता पाने के लिए धर्म या जाति के आधार पर ध्रुवीकरण करने में लग जाते हैं। उन्होने कहा कि इन परिवारिक पार्टियों का उद्देश्य सिर्फ सत्ता पाना होता है। इनकी कोई विचारधारा नहीं है। इनके कार्यक्रम भी लक्ष्यविहीन होते हैं।

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