।।डॉ. आर.बी. दास की रचना।।
बोलने से पहले
सुनना सीखिए,
खर्च करने से पहले
कमाना सीखिए,
हार मानने से पहले
कोशिश करना सीखिए,
रिश्ते बनाने से पहले
निभाना सीखिए,
और मरने के पहले
खुलकर जीना सीखिए…!!
औलाद की वफादारी का पता,
बुढ़ापे में चलता है।
बहन की वफादारी का पता,
जवानी में चलती है।
भाई की वफादारी का पता,
उसकी शादी के बाद चलता है।
पति की वफादारी का पता,
पत्नी के बीमारी में चलता है।
पत्नी की वफादारी का पता,
पति के गरीबी में चलता है…!!
अगर इंसान शिक्षा के पहले संस्कार,
व्यापार के पहले व्यवहार,
भगवान से पहले माता पिता को पहचान ले,
तो जिंदगी में कभी कोई कठिनाई ही नहीं आएगी…

Adv. supreme court,
Advisor (UGC)
National Sec.
SC/ST commission
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