।।हमने अक्सर देखा है।।
डीपी सिंह
सपने जिन्दा हों तो रंग निखरते अक्सर देखा है
सपने में आँखों से गम भी झरते अक्सर देखा है
पर्वत देखा नहीं जिन्होंने, कभी ऊँट पर बैठे तो
लोगों को ऊँचाई का दम भरते अक्सर देखा है
जिनकी आँखों में वीरानी घर कर के ही बैठी हो
उनको हरियाली की चर्चा करते अक्सर देखा है
कोसों दूर हकीकत से कहने को होते हैं, लेकिन
सपने में दिलदारों को भी डरते अक्सर देखा है
काँटे करते रहे हिफाजत, हरदम फूलों-कलियों की
और बागबां को बागों को चरते अक्सर देखा है
रिश्ते के धागे में सपने रोज पिरोते रहते हैं
मोती इस माला के किन्तु बिखरते अक्सर देखा है
आसां तो है सपनों का संसार बसा लेना, लेकिन
सच में सपनों को तिल-तिल कर मरते अक्सर देखा है
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

