ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, हिमंता बिस्वा सरमा, पिनाराई विजयन और एन रंगासामी – इन दिग्गजों की साख दांव पर, चुनावी टक्कर रोचक
कोलकाता | 31 मार्च : 2026 के विधानसभा चुनावों में पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पांच मुख्यमंत्री अपनी-अपनी सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से हर एक की लड़ाई अलग-अलग चुनौतियों से भरी हुई है।
भवानीपुर (पश्चिम बंगाल) से कोलाथुर (तमिलनाडु) तक, इन दिग्गजों की साख दांव पर है। आइए देखते हैं कि इन पांच सीटों पर मुकाबला कितना कड़ा है और किसकी लड़ाई सबसे मुश्किल मानी जा रही है।
1. ममता बनर्जी – भवानीपुर (पश्चिम बंगाल)
भवानीपुर हमेशा से ममता बनर्जी की सुरक्षित सीट रही है, लेकिन 2026 में यह सीट सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में शुमार हो गई है।
भाजपा ने यहां से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को उतारा है। शुभेंदु, जो पहले तृणमूल में ममता के करीबी थे, अब उनके सबसे बड़े विरोधी बन चुके हैं।
भवानीपुर में पिछले कुछ सालों में जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है और शहरी युवा वोटरों की संख्या बढ़ी है।
SIR (विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण) के दौरान यहां 47,000 से ज्यादा नाम कटे हैं, जो ममता के लिए चिंता का विषय है। भाजपा इस सीट को “ममता को घेरने” का प्लान बता रही है।
मुश्किल का स्तर: बहुत ऊंचा। ममता को अपनी परंपरागत सीट बचाने के लिए भारी मेहनत करनी पड़ेगी। अगर यहां हार हुई तो यह उनके करियर के लिए बड़ा झटका होगा।
2. एमके स्टालिन – कोलाथुर (तमिलनाडु)
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन एक बार फिर कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। DMK ने 164 उम्मीदवारों की सूची जारी की है और स्टालिन कोलाथुर से ही मैदान में हैं।
यह सीट DMK का गढ़ मानी जाती है, लेकिन AIADMK और BJP के गठबंधन के साथ-साथ TVK (तamilaga Vetri Kazhagam) जैसे नए दलों का उदय चुनौती बढ़ा रहा है।
कोलाथुर में स्थानीय मुद्दे जैसे पानी, रोजगार और औद्योगिक विकास प्रमुख हैं। स्टालिन की सरकार के प्रदर्शन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर युवा बेरोजगारी को लेकर।
मुश्किल का स्तर: मध्यम। DMK की मजबूत संगठनात्मक पकड़ है, लेकिन विपक्षी एकता और नए दलों के उभरने से चुनौती बढ़ गई है।
3. हिमंता बिस्वा सरमा – जलुकबाड़ी (असम)
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा छठी बार जलुकबाड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और हिमंता यहां से लगातार जीतते आए हैं। कांग्रेस ने यहां से बिदिशा नेगी को उतारा है।
असम में CAA-NRC, घुसपैठ और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण प्रमुख मुद्दे हैं। हिमंता की सरकार ने इन मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया है, जिससे उनका कोर वोट बैंक मजबूत है।
मुश्किल का स्तर: कम। हिमंता की लोकप्रियता और BJP की मजबूत संगठनात्मक पकड़ के कारण यह सीट उनके लिए अपेक्षाकृत आसान मानी जा रही है।
4. पिनाराई विजयन – धर्मादम (केरल)
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन धर्मादम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। LDF (वाम मोर्चा) तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन UDF (कांग्रेस गठबंधन) और BJP दोनों मजबूत चुनौती दे रहे हैं।
केरल में बेरोजगारी, आप्रवासी मजदूरों की समस्या और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण प्रमुख मुद्दे हैं। पिनाराई की सरकार पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद के आरोप भी लग रहे हैं।
मुश्किल का स्तर: ऊंचा। केरल की राजनीति बहुत प्रतिस्पर्धी है और LDF को तीसरा टर्म मिलना आसान नहीं होगा।
5. एन रंगासामी – थत्तांचावड़ी और मंगलम (पुदुचेरी)
पुदुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगासामी दो सीटों – थत्तांचावड़ी और मंगलम – से चुनाव लड़ रहे हैं। AINRC-BJP गठबंधन NDA के तहत चुनाव लड़ रहा है। पुदुचेरी छोटा राज्य होने के बावजूद यहां की राजनीति बहुत जटिल है।
रंगासामी अनुभवी नेता हैं और स्थानीय मुद्दों जैसे पानी, बिजली और पर्यटन पर फोकस कर रहे हैं।
मुश्किल का स्तर: मध्यम। छोटे राज्य में व्यक्तिगत लोकप्रियता महत्वपूर्ण है, लेकिन गठबंधन की राजनीति चुनौती बढ़ा सकती है।
किसकी लड़ाई सबसे मुश्किल?
विश्लेषकों के अनुसार ममता बनर्जी की भवानीपुर वाली लड़ाई सबसे कड़ी और हाई-प्रोफाइल है। शुभेंदु अधिकारी जैसे मजबूत विरोधी के खिलाफ लड़ना और SIR में नाम कटने का मुद्दा उनके लिए बड़ी चुनौती है।
एमके स्टालिन और पिनाराई विजयन की लड़ाई भी कठिन है क्योंकि दोनों राज्यों में विपक्ष मजबूत है। हिमंता बिस्वा सरमा की स्थिति सबसे आरामदायक लग रही है, जबकि एन रंगासामी छोटे राज्य में अनुभव के दम पर मजबूत हैं।
2026 के इन पांच मुकाबलों का नतीजा न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालेगा।
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