खड़गपुर ब्यूरो | 29 मई 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते विवाद के बीच अब CID ने जांच तेज कर दी है। बोलपुर से तृणमूल विधायक चंद्रनाथ सिन्हा के घर CID अधिकारियों के पहुंचने से राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष के नेता के समर्थन में दिए गए रिजॉल्यूशन पर मौजूद हस्ताक्षर वास्तव में उनके हैं या नहीं।सूत्रों के मुताबिक, CID की टीम बोलपुर के नायकपाड़ा स्थित विधायक चंद्रनाथ सिन्हा के घर पहुंची।
इससे पहले चौरंगी की तृणमूल विधायक नयना बंद्योपाध्याय और कैनिंग पूर्व के विधायक हारुल इस्लाम के घर भी जांच अधिकारी जा चुके हैं। खबर यह भी है कि बेलघाटा के तृणमूल विधायक कुणाल घोष के घर भी CID अधिकारियों ने संपर्क किया।
“नाटक करने के बजाय विधायकों को बुला सकते थे” — चंद्रनाथ सिन्हा
CID जांच को लेकर बोलपुर विधायक चंद्रनाथ सिन्हा ने नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने कहा, “ये सब नाटक करने के बजाय मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, जो विधानसभा के सचिव भी हैं, सीधे विधायकों को बुलाकर पूछ सकते थे कि वे शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता मानते हैं या नहीं। इसके लिए केस करके लोगों को भ्रमित करना सही नहीं है।”
उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम CID अधिकारी उनके घर आए थे, लेकिन उस समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि विवादित दस्तावेज पर हस्ताक्षर उनके हैं या नहीं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
दरअसल, 4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और पार्टी को विपक्ष में बैठना पड़ा। इसके बाद 6 मई को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने कालीघाट स्थित आवास पर नव निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई।
बैठक के बाद वरिष्ठ नेता शোভनदेव चट्टोपाध्याय का नाम विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर प्रस्तावित किया गया। इसी समर्थन प्रस्ताव यानी रिजॉल्यूशन पर विधायकों के हस्ताक्षर को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
कई हस्ताक्षरों पर संदेह, CID जांच शुरू
विधानसभा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद इस मामले की जांच CID को सौंपी गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कई विधायकों के हस्ताक्षर संदिग्ध हैं और संभवतः उनकी अनुमति के बिना दस्तावेज में इस्तेमाल किए गए।
इसी वजह से CID अब एक-एक विधायक के घर जाकर पूछताछ कर रही है और हस्ताक्षरों की सत्यता की जांच कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के लिए और बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
तृणमूल के भीतर बढ़ रही बेचैनी
राज्य में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार अंदरूनी संकट और बगावत जैसी स्थिति से जूझ रही है। कई नेता खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अब विपक्ष के नेता के चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
CID की सक्रियता ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक असर पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
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