छत्रपति शिवाजी अपने प्रशासन में दक्ष थे, डॉ. शहाबुद्दीन शेख

उज्जैन । राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा छत्रपति शिवाजी जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय “स्वराज्य निर्माता छत्रपति शिवाजी महाराज” पर मुख्य अतिथि अशोक कुमार जाधव, वरिष्ठ साहित्यकार, मुंबई ने कहा कि शिवाजी अपनी रणनीति में खुद के लिए कुछ नहीं किया बल्कि सब कुछ न्यौछावर किया। शाला के पाठ में शिवाजी महाराज के बारे में पढा़या जाता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशिक्षण प्रदान किया। साथ ही महिलाओं का सम्मान करते थे। और प्राचीन हिंदू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने गोष्ठी की अध्यक्षता की।

विशिष्ट अतिथि डॉ. अरुणा शुक्ला ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज स्वराज्य के निर्णायक रखने वाला सिंह के बल बिना हिचकिचाहट से आगे बड़ा था। शिवाजी जी ने महान कार्य को लिए जीजाऊ माता से प्रेरित होकर हाथी का बल उसमे पढ़ने लगा। वीरता की कहानी हिमालय तक बड़ी।युद्ध में पराक्रम दिखाया। विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रभु चौधरी, महासचिव, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज महामानव जिनके गुरु रामदास है। पराक्रम और शक्तिशाली शिवाजी जिससे हम सभी हमेशा प्रेरित होते रहते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेखा मंत्री ने कहा छत्रपति शिवाजी के पिता शाहजी और माता जीजाऊ थे। छत्रपति जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्हें स्वतंत्र सेनानी के रूप में स्वीकार किया जाता था। सर्व धर्म समभाव रखने वाले थे।

विशिष्ट अतिथि बालासाहेब तोरस्कर ने कहा कि शिवाजी युगपुरुष है। जय भवानी, जय शिवाजी, मुगल शाही थे। जिजाऊ माता का प्रभाव पुत्र पर पड़़ा। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा, विभागाध्यक्ष हिंदी विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के अवदान के बारे में उनके जीवन वृत्त को समझना जिसमें पाश्चात्य भारतीय स्रोत के बारे में बताया। शिवाजी से जुड़े संबंधित ऐतिहासिक परिपाटी, पुरातत्व, लोक साक्ष्य मिलते हैं। शिवाजी कोई सामान्य योद्धा नहीं थे। शिवाजी को भारत निर्माण का दायित्व मिला वह जिजाऊ माता से मिला। हिंदी स्वराज को उन्होंने भारत का नया स्वरूप गढ़ा था। एकता, अखंडता, राष्ट्रगौरव का काम करते थे।

मुख्य वक्ता डॉ. संजीवनी पाटील, महाराष्ट्र ने कहा कि छत्रपति शिवाजी के कहने पर सात योद्धा जो बलिदान हुए। छत्रपति शिवाजी महाराज महानायक थे। सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता रखते थे। उनके साम्राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता थी। हर स्त्री का सम्मान करते थे। तेजी से आक्रमण करना, युद्ध नीति अपनाना, समर्पित सेना का गठन उन्होंने किया था।
विशिष्ट वक्ता डॉ. अनुसुइया अग्रवाल ने कहा शून्य से सृष्टि का निर्माण करने वाले छत्रपति शिवाजी आदर्श राजनीतिज्ञ थे। घोड़े पर सवार शिवाजी जंग के लिए निकलते थे। विशिष्ट वक्ता डॉ. दीपिका सुतोदिया असम ने कहा कि असंगठित प्रशासनिक शिवाजी भोसले मराठी एवं संस्कृत को राजभाषा की भाषा बनाया।वे भारतीय स्वाधीनता संग्राम में नायक के रूप में स्मरण किए जाते हैं। विशिष्ट वक्ता सुवर्णा जाधव, मुख्य राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता को मराठी कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया।

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने कहा कि भारत में ही नहीं विश्व में छत्रपति शिवाजी का जन्म दिवस मनाया जा रहा है। वे मराठा राजा थे। समग्र मानव जाति के कल्याण के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। जिजाऊ माता मानव कल्याण की भावना बचपन में डाल दिया। छत्रपति शिवाजी अपने प्रशासन में दक्ष थे। धर्म और राजनीति में समन्वय स्थापित करते थे। उनके प्रशासन में स्वतंत्रता व बंधुत्व भावना थी। सम्मान प्रतिष्ठा, सामूहिक भोजन, समान वेश पर उन्होंने बल दिया। गोष्ठी का आरंभ डॉ. कुसुम सिंह के सरस्वती वंदना से हुआ। डॉ. भरत शेणकर, महाराष्ट्र ने स्वागत उद्बोधन दिया। गोष्ठी की प्रस्तावना एवं सफल एवं सुंदर संचालन डॉक्टर मुक्ता कान्हा कौशिक राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता राष्ट्रीय शिक्षक सचेतना ने किया। तथा सभी को धन्यवाद का ज्ञापित किया। आभासी गोष्ठी में अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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