Climate कहानी, कोलकाता | 12 दिसंबर 2025 : वैश्विक ऊर्जा जगत में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। लंदन स्थित स्वतंत्र ऊर्जा थिंक-टैंक Ember की नई रिपोर्ट के अनुसार, बैटरी स्टोरेज अब इतना सस्ता हो चुका है कि दिन में बनी सोलर बिजली को रात में भी आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है। यानी सोलर अब सिर्फ “डेलाइट पावर” नहीं रहा—यह 24×7 विश्वसनीय बिजली का स्रोत बन चुका है।
🔋 2025 में बैटरी स्टोरेज की लागत ऐतिहासिक रूप से कम
रिपोर्ट के मुताबिक—
- बैटरी स्टोरेज की लागत गिरकर 65 डॉलर प्रति मेगावॉट-घंटा रह गई है
- यह कीमत चीन और अमेरिका के बाहर की वैश्विक मार्केट के लिए है
- पिछले दो वर्षों में यह गिरावट सबसे तेज़ रही है
Ember की ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी एनालिस्ट कोस्तांसा रेंगेलोवा कहती हैं— “2024 में बैटरी उपकरणों की कीमतें 40% गिरी थीं। 2025 में भी वही तेज़ गिरावट जारी है। उद्योग अभी इस नई हकीकत को समझ रहा है।”

☀️➡️🌙 कैसे सस्ती बैटरी रात में भी ‘सूरज’ जगा देती है?
सोलर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा यही रही— दिन में बिजली मिलती है, रात में नहीं। अब बैटरी इस समस्या को खत्म कर रही है।
✅ रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
- पूरी बैटरी स्टोरेज सिस्टम की लागत: 125 डॉलर/किलोवॉट-घंटा
- इसमें से 75 डॉलर/किलोवॉट-घंटा सिर्फ बैटरी उपकरण की कीमत
- बाकी लागत इंस्टॉलेशन और ग्रिड कनेक्शन की
✅ स्टोरेज के साथ सोलर की कुल लागत
- दिन की आधी सोलर बिजली स्टोर करने पर स्टोरेज लागत: 33 डॉलर/MWh
- वैश्विक औसत सोलर कीमत: 43 डॉलर/MWh
- कुल लागत: 76 डॉलर/MWh
यानी सोलर + बैटरी अब भी दुनिया के कई हिस्सों में कोयले से सस्ता पड़ रहा है। रेंगेलोवा कहती हैं— “अब सोलर सिर्फ दिन में मिलने वाली सस्ती बिजली नहीं रहा, बल्कि ‘कभी भी’ मिलने वाली डिस्पैचेबल बिजली बन गया है. यह खासकर उन देशों के लिए गेम-चेंजर है जहां मांग तेज़ी से बढ़ रही है।”
Ember की गणना बताती है: “अगर दिन की आधी सोलर बिजली को बैटरी में स्टोर किया जाए, तो स्टोरेज की लागत कुल बिजली पर सिर्फ 33 डॉलर/MWh का बोझ डालती है। वैश्विक औसत सोलर कीमत 43 डॉलर/MWh है। इस तरह, स्टोरेज के साथ तैयार बिजली की कुल लागत 76 डॉलर/MWh बैठती है।“
🇮🇳 भारत के लिए इसका क्या मतलब?
रिपोर्ट साफ कहती है कि सस्ती बैटरी और सोलर मिलकर उन देशों के लिए नई रीढ़ बन सकते हैं जो—तेजी से बढ़ती बिजली मांग से जूझ रहे हैं, कोयले पर भारी निर्भर हैं ऊर्जा सुरक्षा के जोखिम देख रहे हैं
भारत में—
- पीक डिमांड लगातार बढ़ रही है
- कोयले पर निर्भरता अभी भी बहुत अधिक है
ऐसे में बैटरी-समर्थित सोलर सिस्टम—
- शहरों
- कस्बों
- और गांवों तक बिजली के भविष्य को बदल सकते हैं।
भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं में जहां पीक डिमांड लगातार बढ़ रही है और कोयले पर निर्भरता अभी भी बहुत अधिक है, बैटरी-समर्थित सोलर सिस्टम शहरों से लेकर गांवों तक बिजली के भविष्य को बदल सकते हैं.
⚡ ऊर्जा क्षेत्र में ‘बदलाव’ का संकेत
Ember का कहना है कि बैटरी स्टोरेज के सस्ता होने के पीछे कई कारण हैं—
- बैटरी की उम्र बढ़ी
- एफिशिएंसी बेहतर हुई
- फाइनेंसिंग लागत कम हुई
- नीतियों ने स्थिर राजस्व मॉडल दिया (जैसे पावर स्टोरेज नीलामी)
इन सबने मिलकर बैटरी स्टोरेज को मुख्यधारा का समाधान बना दिया है।
🌍 क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन का नया अध्याय
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का ऊर्जा भविष्य अब सोलर + बैटरी के संयोजन पर खड़ा होगा। यह जोड़—
- सस्ती बिजली देगा
- स्थिर पावर सिस्टम बनाएगा
- कोयले और तेल पर निर्भरता तेजी से कम करेगा
दुनिया जिस “क्लीन पावर मोमेंट” का इंतज़ार कर रही थी, वह अब तेज़ी से सामने आता दिख रहा है।
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✍️ लेखक: निशान्त | 📅 12 दिसंबर 2025 | 📍 कोलकाता
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