कोलकाता। भारतीय राजनीति में आज यदि कोई दल सबसे अधिक चर्चा में है, तो वह है भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)। इसकी लोकप्रियता, संगठनात्मक मजबूती और राष्ट्रीय सोच ने न केवल इसे सत्ता के शिखर तक पहुंचाया है, बल्कि कार्यकर्ता आधारित राजनीति की नई मिसाल भी पेश की है। बीते कुछ वर्षों में एक विशेष परिवर्तन स्पष्ट रूप से सामने आया है- आज लोग भाजपा में पद पाने की इच्छा से आगे आ रहे हैं।
यह स्थिति पहले की तुलना में बिल्कुल भिन्न है। लगभग 30 वर्ष पूर्व, जब भाजपा सत्ता से दूर थी, तब बहुत से कार्यकर्ता संगठन में केवल विचारधारा से जुड़ाव के कारण आते थे, लेकिन जब जिम्मेदारी लेने की बात आती, तो वे पीछे हट जाते। उस समय पद लेना एक प्रकार की जिम्मेदारी मानी जाती थी, जिसमें लाभ कम और त्याग अधिक था।
परंतु आज स्थिति बदली है। अब भाजपा में ऐसे समर्पित कार्यकर्ता बड़ी संख्या में हैं, जो न केवल संगठन से जुड़ना चाहते हैं, बल्कि उसके माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। ऐसे कार्यकर्ता पद पाने के लिए इसीलिए आगे बढ़ते हैं, ताकि वे संगठन को और अधिक मजबूती दे सकें। यह एक अत्यंत शुभ संकेत है, जो किसी भी जीवंत संगठन के लिए आवश्यक होता है।

भाजपा का इतिहास त्याग, संघर्ष और तपस्या से भरा पड़ा है। जब पार्टी के पास सत्ता नहीं थी, संसाधन सीमित थे और उसकी विचारधारा को मीडिया समर्थन भी बहुत कम मिलता था, तब भी भाजपा के कार्यकर्ता राष्ट्रवाद के विचार से जुड़े रहे। वे अपने स्वयं के संसाधनों से प्रचार-प्रसार करते, जनजागरण अभियान चलाते, और गांव-गांव पार्टी की नीतियों को लेकर जाते।
उस समय पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए पद का कोई आकर्षण नहीं था। वे पद से नहीं, सेवा से प्रेरित थे। लेकिन साथ ही यह भी सच है कि कई लोग पद लेने से कतराते थे, क्योंकि उसमें उत्तरदायित्व था, संघर्ष था, और उस संघर्ष के बदले में कोई तात्कालिक लाभ नहीं दिखता था।
वर्तमान परिदृश्य पर नज़र डालें तो पद की होड़ या सेवा का अवसर? एक प्रश्नवाचक खड़ा करता है।
आज भाजपा सत्ता में है और उसने संगठन को जमीनी स्तर तक सशक्त किया है। बूथ, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर तक एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार हुआ है। इस संगठन में अब ऐसे युवा कार्यकर्ता तेजी से सामने आ रहे हैं, जो काम करना चाहते हैं। वे पद की दौड़ में इसीलिए भाग रहे हैं ताकि उन्हें एक ऐसा मंच मिले, जिससे वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
यह स्थिति निश्चित रूप से सकारात्मक है, लेकिन साथ ही यह भी एक बड़ी चुनौती है। संगठन में पद सीमित हैं, जबकि काम करने वाले लोगों की संख्या कहीं अधिक हो गई है। कई बार यह देखा गया है कि जो कार्यकर्ता अत्यंत समर्पित हैं, उन्हें काम करने का अवसर नहीं मिल पाता। यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण होती है, क्योंकि इससे कार्यकर्ता का मनोबल टूट सकता है।
संगठन की जिम्मेदारी है कि वह अपने लोगों को जागरूक कर अवसर और मार्गदर्शन दें। किसी भी सफल संगठन के लिए यह आवश्यक होता है कि वह अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को सही मार्गदर्शन और उचित मंच प्रदान करे। भाजपा को इस दिशा में और अधिक सजग होने की आवश्यकता है। पार्टी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्यकर्ता केवल पद की प्रतीक्षा में न रह जाएं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, योजनाओं में भागीदारी, और सामाजिक अभियान में सक्रिय भूमिका मिले।
यदि एक कार्यकर्ता पार्टी के लिए समर्पण भाव से काम कर रहा है, तो उसके प्रयासों को संगठन में मान्यता मिलनी चाहिए। केवल पद ही सम्मान का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि सक्रियता, रचनात्मक सुझाव, जनसंपर्क और सामाजिक व्यवहार भी मूल्यांकन का आधार बनना चाहिए। कार्यकर्ता ही भाजपा की आत्मा इन्हें सम्मान से रखें ये श्यामा प्रसाद मुखर्जी कहा करते थे।
भाजपा की सबसे बड़ी शक्ति उसके कार्यकर्ता हैं। यही कारण है कि पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन सकी। जब कांग्रेस जैसी पार्टियां परिवारवाद और जातिवाद में उलझी रहीं, तब भाजपा ने विचार और कार्यकर्ता को केंद्र में रखा। अब जब भाजपा सत्ता में है, तो यह उसकी नैतिक जिम्मेदारी है कि वह इन कार्यकर्ताओं को और अधिक सशक्त बनाए।
यह भी आवश्यक है कि भाजपा में ऐसा माहौल बनाया जाए, जहां कार्यकर्ता केवल पद के लिए नहीं, राष्ट्र सेवा की भावना से प्रेरित होकर कार्य करें। कार्यकर्ता यदि यह महसूस करें कि उन्हें संगठन में सुना जा रहा है, उनकी भूमिका महत्व रखती है, तो वे न केवल लंबे समय तक जुड़े रहेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनेंगे।
आज भाजपा में जो स्थिति है कि लोग पद के लिए आगे बढ़ रहे हैं, वह पार्टी की मजबूती का प्रमाण है। यह बताता है कि भाजपा में अब अवसर हैं, मंच है, और सबसे बड़ी बात, राष्ट्र के लिए कुछ करने की संभावनाएं हैं। लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पद की दौड़ में किसी कार्यकर्ता का समर्पण नकारा न जाए।
भाजपा को चाहिए कि वह अपनी कार्यसंस्कृति को इस प्रकार विकसित करे कि हर कार्यकर्ता, चाहे पद पर हो या न हो, संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे। यही भावनात्मक जुड़ाव पार्टी को लंबे समय तक मजबूत रखेगा, और यही वह रास्ता है जो भारत को आत्मनिर्भर, गौरवशाली और समृद्ध राष्ट्र बनने की दिशा में ले जाएगा।
लेखक परिचय :
हरि मिश्रा भारतीय जनता पार्टी, पश्चिम बंगाल के प्रवक्ता हैं। वे लंबे समय से संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं और भाजपा के राष्ट्रवादी विचारों के प्रखर समर्थक हैं।

भाजपा युवा मोर्चा पश्चिम बंगाल
(स्पष्टीकरण : इस आलेख में दिए गए विचार लेखक के हैं और इसे ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है।)
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