कोलकाता। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल के शिक्षा राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी और उनकी बेटी अंकिता अधिकारी के खिलाफ आपराधिक साजिश और सबूतों को नष्ट करने से संबंधित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इस बीच, लगभग 48 घंटे तक सीबीआई के साथ लुका-छिपी खेलने के बाद, परेश चंद्र अधिकारी गुरुवार शाम को कोलकाता हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां से उन्हें सीबीआई अधिकारियों द्वारा पूछताछ के लिए सीधे सेंट्रल कोलकाता स्थित सीबीआई के निजाम पैलेस कार्यालय ले जाया गया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा था कि अंकिता अधिकारी को एक सरकारी स्कूल में अवैध रूप से राजनीति विज्ञान की शिक्षका के तौर पर नियुक्त किया गया था।

अदालत ने नोट किया कि उनकी नियुक्ति मेरिट सूची में अर्हता (क्वालीफाइंग) प्राप्त किए बिना और व्यक्तित्व परीक्षण के लिए उपस्थित हुए बिना ही कर दी गई थी। सरकारी स्कूलों में ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के लिए राजनीति विज्ञान के शिक्षकों की भर्ती में सीबीआई जांच का आदेश देते हुए, एकल-न्यायाधीश पीठ ने परेश चंद्र अधिकारी को मंगलवार को रात 8 बजे तक कोलकाता में सीबीआई कार्यालय में उपस्थित होने का आदेश दिया था। आदेश आया तो अधिकारी कूचबिहार जिले में थे।

मंगलवार की रात उन्हें अपनी बेटी के साथ कूचबिहार से कोलकाता जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ते देखा गया, जो जाहिर तौर पर सीबीआई पूछताछ के लिए कोलकाता जाने के लिए बाध्य थे। हालांकि बाद में पता चला कि बुधवार की सुबह पिता और पुत्री बर्दवान रेलवे जंक्शन पर ट्रेन से उतरे, जिसकी पुष्टि स्टेशन पर लगे सीसीटीवी की फुटेज से हुई। तब से मंत्री और उनकी बेटी दोनों लापता हो गए थे। न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने मंत्री के इस आचरण पर संज्ञान लिया और सीबीआई से अदालत की अवमानना के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को कहा। अंतत: गुरुवार शाम को मंत्री सीबीआई कार्यालय पहुंचे। हालांकि इस दौरान उनकी बेटी का कोई पता नहीं चल पाया कि वह फिलहाल कहां पर हैं।

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