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ऑनलाइन ओपन माइक में कोलकाता के युवाओं ने किया कला का प्रदर्शन

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कोलकाता : महामारी कोविड-19 से बचाव हेतु उठाए गए कदमों के कारण कई महीनों से कलाकारों तथा साहित्यकारों से मंच छिन चुका है। जिस...

अभिषेक पाण्डेय की कविता : “हिंदी का हो रहा सोलह श्रृंगार”

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"हिंदी का हो रहा सोलह श्रृंगार"  'इंग्लिश' लगाती पैरों में महावर 'भोजपुरी' ने हाथों में रचायी मेहंदी है। मिल सब सखियाँ कर रहीं श्रृंगार 'हिंदी' का अभिलाषा हो रही पूरी सबकी...

हावड़ा के अभिषेक पाण्डेय बने “हिंदी हैं हम” कविता प्रतियोगिता के विजेता

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पंजाब विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर दिनांक 14.9.20 को परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी हैं...

रूपल की कविता – “सपनों के चिथड़े”

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"सपनों के चिथड़े" आज मैंने जब देखा कांधे पर चढ़े तुम्हारे बच्चों की आँखें उनमें उनके सपनों के चिथड़े उड़ रहे थे तुम्हारे नंगें पावों के एक- एक...

रिया सिंह की कविता : “प्रेम”

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“प्रेम” उन अंजान राहों में हुई थी मुलाकात उनसे जाने अंजाने में हुई थी बात उनसे सहम सा गया था ये दिल कुछ अंधविश्वासों से कुछ इसी तरह के दर्द...

चित्रकारी में चैन तलाशती कोलकाता की अनिता कुमारी

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तारकेश कुमार ओझा, कोलकाता : पूत के पांव पालने में नजर आते हैं। वहीं बेटियाँ की बोली और बुद्धिमत्ता से उसके भावी जीवन की...

रिया सिंह की कविता : “जगत जननी”

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“जगत जननी” जिसके सपने टूट कर भी, एक आशा लेकर जारी है गुणों से युक्त है वो पर कहलाती दुखियारी है क्या उसका भाग्य यही है? जिसका  नाम नारी है। एक...

रिया सिंह की कविता : “गौ हत्या”

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“गौ हत्या” पाप से तुमको डर नहीं लगता? इतना सच सच कहना तुम। हे मनुष्य अब बंद करो गौ की हत्या करना तुम। है वह भी किसी की जननी बस...

रिया सिंह की कविता : “अबकी बारिश”

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“अबकी बारिश” ये आसमाँ में उमड़ कर जमी पर बिखर जाते हैं ये बारिश है जनाब जमी पे पड़ते ही खुशबू सी महक जाते हैं,  कभी किसी के दूंखो का हिस्सा...

इस महामारी ने वैश्वीकरण को मजबूत किया है या कमजोर (आलेख) : रिया सिंह

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आज बात जब पूरे विश्व की है तो यहां किसी एक परिणाम पर पहुंचना तर्कसंगत मालूम होता है जिस प्रकार दिन – रात का...

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