कोलकाता हिन्दी न्यूज | 23 जुलाई 2026: कलकत्ता विश्वविद्यालय ने चैतन्य वैष्णव दर्शन, साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक अध्ययन एवं अनुसंधान को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
विश्वविद्यालय ने ‘भक्तिवेदांत इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर चैतन्य वैष्णव स्टडीज’ (BICECVS) का सैटेलाइट सेंटर स्थापित किया है।
इस केंद्र का उद्घाटन बुधवार को मोतीलाल नेहरू रोड स्थित भक्तिवेदांत रिसर्च सेंटर (BRC) में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) आशुतोष घोष ने किया। यह केंद्र कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और भक्तिवेदांत रिसर्च सेंटर के संयुक्त सहयोग से स्थापित किया गया है।
केंद्र किसे समर्पित है?
यह केंद्र इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य और कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र श्रील प्रभुपाद तथा श्री चैतन्य महाप्रभु की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक विरासत को समर्पित है।
कुलपति का बयान
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. आशुतोष घोष ने कहा कि यह केंद्र चैतन्य वैष्णव अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा प्रदान करेगा और भारतीय ज्ञान परंपरा तथा गौड़ीय वैष्णव दर्शन के वैश्विक प्रसार के लिए एक सशक्त अकादमिक मंच बनेगा।
केंद्र के उद्देश्य
भक्तिवेदांत रिसर्च सेंटर के डीन डॉ. सुमंत रुद्र ने बताया कि इस केंद्र के माध्यम से चैतन्य वैष्णव परंपरा से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण, संपादन और प्रकाशन के साथ-साथ उच्च शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्र के निदेशक प्रो. (डॉ.) कमल किशोर मिश्र ने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप यह केंद्र बंगाल की समृद्ध वैष्णव भक्ति परंपरा, चैतन्य साहित्य और दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, अध्ययन तथा वैश्विक प्रचार-प्रसार का अग्रणी संस्थान बनेगा।
मौजूद प्रमुख व्यक्ति
उद्घाटन समारोह में संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मऊ दासगुप्ता, केंद्र के निदेशक प्रो. कमल किशोर मिश्र, डॉ. सुमंत रुद्र सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शिक्षाविद्, शोधकर्ता और विद्वान उपस्थित रहे।
कलकत्ता विश्वविद्यालय की यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक अकादमिक संवाद को मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।
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