Calcutta highcourt

कलकत्ता हाईकोर्ट का अहम फैसला : पोस्टमार्टम में शराब की गंध मात्र से मुआवजा नहीं रोका जा सकता

डिजिटल डेस्क। कोलकाता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना मुआवजे के मामलों में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के पेट से शराब की गंध आने मात्र से उसके परिजनों को मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

नशे में वाहन चलाने का आरोप तभी मान्य होगा, जब रक्त में अल्कोहल की मात्रा का परीक्षण या कानूनी प्रक्रिया से यह साबित हो जाए।

न्यायमूर्ति बिश्वरूप चौधरी की एकल पीठ ने मंगलवार (16 दिसंबर) को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मृतक के परिजनों को 11.41 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

मामले का पूरा विवरण

  • दुर्घटना: 2020 में हुगली जिले में एक मोटरसाइकिल सवार की ट्रक से टक्कर में मौत हो गई थी। मृतक की उम्र 35 साल थी और वह परिवार का इकलौता कमाने वाला था।
  • बीमा कंपनी का दावा: कंपनी ने मुआवजा देने से इनकार किया, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के पेट से शराब की गंध आने का जिक्र था। कंपनी ने इसे “नशे में ड्राइविंग” का मामला बताकर पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन करार दिया।
  • ट्रायल कोर्ट का फैसला: मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने कंपनी के दावे को खारिज करते हुए 11.41 लाख रुपये (मृत्यु मुआवजा, ब्याज सहित) देने का आदेश दिया।
  • हाईकोर्ट का तर्क: न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा, “मृत व्यक्ति खुद अपना बचाव नहीं कर सकता। शराब की गंध मात्र से नशे में ड्राइविंग साबित नहीं होती। इसके लिए रक्त अल्कोहल टेस्ट या अन्य ठोस सबूत जरूरी हैं।” कोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ गंध पर आरोप लगाना अन्याय है।

फैसले की मुख्य बातें

बिंदु कोर्ट का फैसला
शराब की गंध मात्र गंध से नशे का आरोप नहीं लगाया जा सकता
जरूरी सबूत रक्त अल्कोहल परीक्षण या कानूनी प्रमाण
मुआवजा राशि 11.41 लाख रुपये बरकरार
अपील न्यू इंडिया एश्योरेंस की अपील खारिज

यह फैसला सड़क दुर्घटना मुआवजे के हजारों मामलों में राहत दे सकता है, जहां बीमा कंपनियां छोटे-छोटे आधार पर दावे खारिज कर देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे क्लेम सेटलमेंट आसान होगा और परिजनों को न्याय मिलेगा।

कोर्ट ने बीमा कंपनी को चार हफ्तों में मुआवजा देने का निर्देश दिया है। क्या यह फैसला पूरे देश में मिसाल बनेगा? अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए।

इस फैसले पर आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं – बीमा क्लेम में और बदलाव चाहिए?

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