कोलकाता हिन्दी न्यूज | 27 जुलाई 2026: अपनी पसंद से शादी करना बालिग नागरिकों का अधिकार है और विवाह के लिए अलग-अलग धर्म का होना अपने आप में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
अंतरधार्मिक विवाह करने जा रहे एक जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने साथ ही आगामी 29 जुलाई को होने वाली शादी के दौरान पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
यह मामला उलुबेरिया क्षेत्र से जुड़ा है, जहां करीब 15 वर्षों से संबंध में रह रहे एक अंतरधार्मिक जोड़े ने अब विवाह करने का फैसला किया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि शादी के फैसले के बाद उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
15 साल के रिश्ते के बाद शादी का फैसला
जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच पिछले करीब 15 वर्षों से संबंध हैं। अब दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया है। लेकिन आरोप है कि शादी नहीं करने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
युगल का दावा है कि उन्हें पारिवारिक कारोबार को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई। इसके बाद उन्होंने सुरक्षा और अपने विवाह के अधिकार की रक्षा के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई।
‘तीसरे पक्ष की ओर से मिल रही धमकी’
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकासरंजन भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि शादी में बाधा परिवार की ओर से नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक तीसरे पक्ष की ओर से डाली जा रही है।
वकील के अनुसार, एक राजनीतिक दल से जुड़े संगठन की ओर से भी लगातार कथित तौर पर दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि मैरिज रजिस्ट्रार की ओर से नोटिस जारी होने के बाद लड़की के पिता को कथित तौर पर बुलाकर शादी पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए कहा गया और धमकी भी दी गई।
इन आरोपों पर अदालत ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और सुरक्षा के मुद्दे पर पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि भारतीय कानून के तहत बालिग व्यक्ति अपनी सहमति से विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं। केवल इस वजह से कि दोनों अलग-अलग धर्मों से आते हैं, उनके विवाह में बाधा नहीं डाली जा सकती।
इसी आधार पर अदालत ने निर्देश दिया कि 29 जुलाई को विवाह के दौरान पुलिस पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो।
पुलिस पहले से कर रही है निगरानी
राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि उलुबेरिया की इस घटना में पुलिस पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कर चुकी है।
उन्होंने बताया कि दोनों के बालिग होने को ध्यान में रखते हुए पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि विवाह समारोह के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
राज्य की ओर से यह भी बताया गया कि कथित तौर पर परिवार की ओर से ही अशांति की आशंका है। इसके बाद अदालत ने पुलिस को मामले की स्थिति पर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
क्यों अहम है यह आदेश?
कलकत्ता हाई कोर्ट का यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक बार फिर बालिग व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद और विवाह की स्वतंत्रता के अधिकार पर जोर दिया गया है।
विवाह दो वयस्कों की सहमति से होने वाला व्यक्तिगत निर्णय है। ऐसे मामलों में धर्म, सामाजिक दबाव या किसी तीसरे पक्ष की धमकी के कारण यदि सुरक्षा का खतरा पैदा होता है, तो प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखे और संबंधित नागरिकों को सुरक्षा उपलब्ध कराए।
इस मामले में भी अदालत ने विवाह पर रोक लगाने के बजाय जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
29 जुलाई को होनी है शादी
फिलहाल इस अंतरधार्मिक जोड़े की शादी 29 जुलाई को प्रस्तावित है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है। अब सभी की नजर अदालत में दाखिल होने वाली पुलिस की रिपोर्ट पर रहेगी।
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