कोलकाता हिन्दी न्यूज | 29 सितम्बर 2026: विपक्ष के नेता रहते हुए शुभेंदु अधिकारी के पूर्व मेदिनीपुर जिले के कोलाघाट स्थित किराये के मकान और कार्यालय में पुलिस तलाशी से जुड़ा मामला कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
अदालत में कोलाघाट थाने की ओर से पेश रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी के दौरान कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई थी और खाली जब्ती सूची तैयार की गई थी। इसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ी।
लोकसभा चुनाव से पहले हुई थी पुलिस की तलाशी
यह घटना मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान हुई थी। पुलिस कोलाघाट स्थित उस मकान में पहुंची थी, जिसे शुभेंदु अधिकारी अपना किराये का आवास और कार्यालय बताते थे। पुलिस का कहना था कि वह एक फरार आरोपी की तलाश में वहां गई थी।
शुभेंदु अधिकारी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आपत्ति जताई थी। उनके पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि करीब 70 से 80 पुलिसकर्मियों ने मकान को घेरकर तलाशी ली। उस समय अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे।
तलाशी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पुलिस कार्रवाई की खबर मिलने पर स्थानीय भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे थे। वहां पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी चुनावी कार्यक्रम छोड़कर कोलाघाट थाने पहुंचे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि थाने में कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था। शुभेंदु ने यह भी कहा था कि उन्हें हाई कोर्ट से संरक्षण प्राप्त है और पुलिस उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती।
उनका सवाल था कि यदि पुलिस के पास तलाशी वारंट था, तो उनकी मौजूदगी में तलाशी क्यों नहीं ली गई और उसकी वीडियोग्राफी क्यों नहीं कराई गई।
उस समय शुभेंदु ने अपने वृद्ध माता-पिता को परेशान किए जाने का आरोप भी लगाया था। ये आरोप उनके द्वारा लगाए गए थे; पुलिस की ओर से तलाशी का कारण एक फरार आरोपी की तलाश बताया गया था।
तलाशी में कुछ नहीं मिला, जांच आगे नहीं बढ़ी
कोलाघाट थाने की रिपोर्ट के मुताबिक, तलाशी में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला और जब्ती सूची खाली रही। इसी वजह से जांच आगे नहीं बढ़ाई गई। टीवी9 बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने इसके बाद मामला खारिज कर दिया। <Cite ref=”turn269900view0″/>
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी याचिका में यह आरोप भी लगाया था कि तलाशी के दौरान पुलिस के साथ राजनीतिक परामर्शदाता संस्था आई-पैक के लोग मौजूद थे। यह आरोप उनकी ओर से अदालत में उठाया गया था।
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