कोलकाता | 2 सितंबर 2025 : कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) द्वारा जारी की गई ‘दागी उम्मीदवारों’ की सूची को चुनौती दी गई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अधीन है और जब तक शीर्ष अदालत में याचिकाएं लंबित हैं, तब तक हाईकोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया की साख और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
📌 क्या है मामला?
- सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को आदेश दिया था कि WBSSC उन सभी उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक करे जिनकी नियुक्तियाँ 2016 की राज्य स्तरीय चयन परीक्षा (SLST) के तहत हुई थीं और जिन्हें भ्रष्टाचार या अनियमितता के कारण रद्द किया गया है।
- WBSSC ने 30 अगस्त को अपनी वेबसाइट पर 1,804 ‘दागी’ उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित की।
- इन उम्मीदवारों में से कई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वे निर्दोष हैं और उन्हें ‘दागी’ कहना अनुचित है।
⚖️ हाईकोर्ट का फैसला:
- न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं और मामला वहां विचाराधीन है, इसलिए हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
- उन्होंने याचिकाकर्ताओं के “बेदाग शिक्षक” होने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह सूची सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वैध रूप से प्रकाशित की गई है।
🧾 कानूनी और प्रशासनिक प्रभाव:
- इस फैसले के बाद WBSSC की सूची सार्वजनिक डोमेन में बनी रहेगी और उस पर कोई सवाल फिलहाल नहीं उठाया जा सकता।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, 25,000 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियाँ रद्द की जा चुकी हैं, जिनमें ये 1,804 उम्मीदवार भी शामिल हैं।
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