कोलकाता न्यूज डेस्क | 15 जून 2026: पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व (Buxa Tiger Reserve) में एक बार फिर बाघों की वापसी का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
राज्य के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने कहा कि यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं, तो 29 जुलाई को बक्सा में बाघ छोड़े जाएंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय वन मंत्री, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रह सकते हैं।
बक्सा में फिर बसेंगे बाघ
रविवार को बक्सा टाइगर रिजर्व के सिकियाझोरा पर्यटन केंद्र के निरीक्षण के बाद वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने कहा,
“बक्सा टाइगर रिजर्व बाघों की प्राकृतिक भूमि है। यहां बाघों को हर हाल में वापस लाया जाएगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो 29 जुलाई को बाघों को यहां छोड़ा जाएगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिससे यह राज्य के वन्यजीव संरक्षण इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकता है।
जयंती वन बस्ती के पुनर्वास पर भी दिया संकेत
पत्रकारों द्वारा जयंती वन बस्ती के संभावित पुनर्वास को लेकर पूछे गए सवाल पर वन मंत्री ने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो वहां के निवासियों का स्थानांतरण किया जाएगा, लेकिन सभी निर्णय स्थानीय लोगों की सहमति और राय को ध्यान में रखकर ही लिए जाएंगे।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
कभी 20 से अधिक बाघों का घर था बक्सा
बक्सा टाइगर रिजर्व को वर्ष 1982 में देश का 15वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। उस समय इस वन क्षेत्र में 20 से अधिक बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। लगभग 760 वर्ग किलोमीटर में फैले इस संरक्षित क्षेत्र में पहाड़ी और मैदानी दोनों प्रकार का भूभाग शामिल है।
हालांकि समय के साथ शिकार, आवासीय दबाव और अन्य कारणों से यहां बाघों की संख्या लगातार घटती गई और वर्तमान में यह क्षेत्र पूरी तरह बाघविहीन हो चुका है।
भूटान से आने वाले बाघों की तस्वीरों ने जगाई उम्मीद
पिछले दो वर्षों में ट्रैप कैमरों में भूटान की सीमा से बक्सा क्षेत्र में बाघों की आवाजाही दर्ज की गई थी। इन तस्वीरों ने वन विभाग की उम्मीदों को नई ऊर्जा दी और इसके बाद बाहरी राज्यों से बाघ लाकर यहां स्थायी आबादी विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई।
अब 29 जुलाई को प्रस्तावित टाइगर रिलीज कार्यक्रम को उसी दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा
वन मंत्री की घोषणा के बाद बक्सा टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि बाघों की स्थायी मौजूदगी स्थापित होती है तो यहां टाइगर टूरिज्म को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी बल्कि स्थानीय रोजगार, होटल व्यवसाय, गाइड सेवाओं और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
अधिकारी फिलहाल टिप्पणी से बचे
निरीक्षण के दौरान बक्सा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर कुमार बिमल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि कुमार बिमल ने इस परियोजना के तकनीकी पहलुओं या बाघों के स्रोत को लेकर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
वन विभाग अब अंतिम तैयारियों में जुटा हुआ है और यदि सब कुछ योजना के अनुरूप रहा तो 29 जुलाई को बक्सा टाइगर रिजर्व एक नए इतिहास का गवाह बन सकता है।
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