कोलकाता हिन्दी न्यूज | 09 अगस्त 2026: पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ माकपा नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए पार्टी ने महत्वपूर्ण पहल की है।
माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बुद्धदेव भट्टाचार्य की स्मरणसभा में उनके नाम पर एक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र स्थापित करने की घोषणा की।
इसके साथ ही पार्टी की वेबसाइट पर बुद्धदेव भट्टाचार्य के जीवन, विचारों और कार्यों से जुड़ी सामग्री के लिए एक विशेष पेज भी तैयार किया जाएगा।
‘दूरदर्शी थे बुद्धदेव भट्टाचार्य’
स्मरणसभा को संबोधित करते हुए मोहम्मद सलीम ने बुद्धदेव भट्टाचार्य को दूरदर्शी और भविष्य को भांपने वाला नेता बताया।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में बुद्धदेव भट्टाचार्य लगातार सवाल उठाते थे कि राज्य में बदलाव क्यों हुआ और इस बदलाव से पश्चिम बंगाल को क्या हासिल हुआ।
सलीम के अनुसार, बुद्धदेव भट्टाचार्य ने उस समय ही राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर कई चेतावनियां दी थीं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जिन परिस्थितियों की आशंका जताते थे, उनमें से कई बातें आज देखने को मिल रही हैं।
माकपा नेता ने कहा कि बुद्धदेव भट्टाचार्य के विचारों और उनकी राजनीतिक समझ को केवल पार्टी की सीमाओं में नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
बुद्धदेव के राजनीतिक जीवन के साथ सांस्कृतिक पक्ष भी होगा संरक्षित
स्मरणसभा में माकपा के पूर्व राज्य सचिव और पूर्व मंत्री सूर्यकांत मिश्रा ने भी बुद्धदेव भट्टाचार्य से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि पार्टी और सरकार के काम के सिलसिले में उन्हें कई बार बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ यात्रा करने का अवसर मिला।
इस दौरान उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री के साहित्य और विशेष रूप से रवींद्रनाथ ठाकुर के बारे में उनके गहरे ज्ञान को करीब से देखने का अवसर मिला।
सूर्यकांत मिश्रा ने बुद्धदेव के सांस्कृतिक व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें एक बार पूर्व मुख्यमंत्री को गीत गाते हुए सुनने का अनुभव भी हुआ था।
उनके मुताबिक बुद्धदेव भट्टाचार्य को याद करने का अर्थ केवल उनके मुख्यमंत्री या राजनेता के रूप में योगदान की चर्चा करना नहीं है। उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक पक्ष को भी समझना जरूरी है।
ज्योति बसु रिसर्च सेंटर की तर्ज पर बनेगा केंद्र
मोहम्मद सलीम ने बताया कि पार्टी ज्योति बसु रिसर्च सेंटर की तर्ज पर बुद्धदेव भट्टाचार्य के नाम पर एक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है।
इस केंद्र के माध्यम से बुद्धदेव भट्टाचार्य के राजनीतिक विचार, प्रशासनिक कार्य, साहित्यिक रुचियां और सांस्कृतिक गतिविधियां अध्ययन का विषय बनेंगी।
केंद्र के नाम को अंतिम रूप देने से पहले आम लोगों से सुझाव भी लिए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बुद्धदेव भट्टाचार्य की विरासत को व्यापक स्तर पर संरक्षित करना और उनके विचारों पर चर्चा के लिए एक मंच तैयार करना है।
आम लोगों से दस्तावेज और तस्वीरें देने की अपील
माकपा ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी व्यक्ति के पास बुद्धदेव भट्टाचार्य से जुड़ी पुरानी तस्वीरें, दस्तावेज, पत्र, लेख या अन्य महत्वपूर्ण सामग्री मौजूद है, तो उसे पार्टी के पास उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
इन सामग्रियों को डिजिटल और भौतिक रूप से संरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने की योजना है।
वेबसाइट पर बनेगा विशेष पेज
बुद्धदेव भट्टाचार्य के जीवन और कार्यों से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यम से भी संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए पार्टी की वेबसाइट पर एक अलग पेज तैयार करने की योजना है।
इस पेज पर उनके राजनीतिक जीवन के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
इससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम लोगों को भी बुद्धदेव भट्टाचार्य के जीवन और विचारों से संबंधित सामग्री एक जगह उपलब्ध हो सकेगी।
इस पहल के जरिए माकपा अब बुद्धदेव भट्टाचार्य की विरासत को केवल राजनीतिक स्मृति के रूप में नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में संरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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