कोलकाता हिन्दी न्यूज | 10 सितम्बर 2026: भारतीय ज्ञान-परंपरा के विशाल भंडार को आधुनिक नेतृत्व, संगठनात्मक विकास और कार्यक्षेत्र की कार्यक्षमता से जोड़ने की दिशा में भक्ति वेदांत रिसर्च सेंटर (बीआरसी) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge Systems) से जुड़े शोध और विद्वतापूर्ण कार्यों को समकालीन नेतृत्व और व्यावसायिक प्रबंधन की जरूरतों से जोड़ने के लिए बीआरसी ने विमेंटर.एआई और सारथी.एआई के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।
मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस साझेदारी के तहत समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
विमेंटर.एआई की सह-संस्थापक मीनू भाटिया और डॉ. श्रीनिवास चुंदुरु तथा बीआरसी के ट्रस्टी श्री गौरांग दास और डॉ. सुमंत रुद्र ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जरूरतों से जोड़ने का उद्देश्य
भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा में मानव व्यवहार, नेतृत्व, नैतिकता, जिम्मेदारी, आत्म-नियंत्रण, शिक्षा, निर्णय लेने और संस्थान संचालन जैसे विषयों पर लंबे समय से गहन चिंतन किया गया है।
इस ज्ञान को केवल इतिहास या दर्शन तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक कार्यक्षेत्र में इसकी उपयोगिता और प्रासंगिकता तलाशना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
बीआरसी के डीन डॉ. सुमंत रुद्र ने कहा, “भारतीय ज्ञान प्रणाली को लेकर बीआरसी के शोध और ज्ञान-अनुसंधान को आधार बनाकर आधुनिक नेतृत्व और संगठनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। साथ ही भारतीय ज्ञान-परंपरा की गहराई, मौलिकता और विशिष्टता को बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।”
किन क्षेत्रों में होंगे कार्यक्रम
इस सहयोग के तहत नेतृत्व विकास, संगठनात्मक संस्कृति, निर्णय लेने की क्षमता, कर्मचारियों की कार्यक्षमता और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के कौशल विकास जैसे विषयों पर कार्यक्रम तैयार करने की योजना है।
विमेंटर.एआई की सह-संस्थापक मीनू भाटिया ने कहा, “इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह समझना है कि भारत की अपनी बौद्धिक और ज्ञान परंपरा से नेतृत्व, संस्थान निर्माण और दीर्घकालिक कार्यक्षमता के बारे में क्या सीख हासिल की जा सकती है।”
बीआरसी के ट्रस्टी श्री गौरांग दास ने कहा, “भारतीय ज्ञान प्रणाली में मानव व्यवहार, नेतृत्व, नैतिकता, उद्देश्य, शिक्षा और संस्थान संचालन से संबंधित व्यापक ज्ञान मौजूद है। आधुनिक समय में इस ज्ञान की प्रासंगिकता तलाशने के साथ-साथ उसकी गहराई और मौलिकता को बनाए रखना भी जरूरी है।”
सेतु बनेगा प्राचीन और आधुनिक का
इस रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से बीआरसी के शोध एवं ज्ञान-अनुसंधान को विमेंटर.एआई के नेतृत्व और संगठनात्मक बदलाव से जुड़े अनुभव तथा सारथी.एआई की तकनीक आधारित शिक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाने की पद्धतियों के साथ जोड़ा जाएगा।
इससे भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक कार्यक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तुत करने और उसके व्यावहारिक उपयोग की नई संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है।
इस पहल को भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक प्रबंधन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जा रहा है।
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