कविता कोठारी, कोलकाता। डॉ. वसुंधरा मिश्र की पुस्तक- ‘नवदुर्गा नवरूप’ नवरात्रि पर आपके विषद ज्ञान और विस्तृत शोध को परिलक्षित करती है। आपने तथ्यों, सिद्धांतों की खोज की है तथा एक व्यवस्थित, गहन जांच शामिल की है। जो इस पुस्तक को एक बहुमूल्य दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करती है।
आपने इस व्यापक विषय के धार्मिक पहलू के साथ-साथ ही प्रकृति के विभिन्न अवयवों के साथ इस महापर्व के अंतरंग जुड़ाव के बारे में गहन विश्लेषण किया है।
माँ दुर्गा का विस्तृत परिचय देते हुए माँ के नौ रूपों को नौ रचनाओं में संकलित किया है। प्रत्येक कविता के पूर्व उसे कविता विशेष में माँ के उस रूप के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। कविताएँ समसामयिक सामाजिक, प्राकृतिक एवं भावनात्मक उद्देश्यों को परिभाषित करती हैं।
भाषा सरल और सीधे भाव व्यक्त करने वाली है, जो आम पाठक से जुड़ती है। जैसे नवरात्रि के 9 दिन एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं और एक निरंतर आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक हैं।
यह नौ दिनों की साधना शारीरिक और मानसिक शुद्धि का एक अनुशासित क्रम है, जहाँ हर दिन का अपना विशेष महत्व होते हुए भी वे एक पूर्ण शक्ति (देवी) के अंतर्गत जुड़े हुए हैं।
ठीक इसी तरह आपकी प्रत्येक कविता अलग-अलग दिनों के माँ के स्वरूप और गुण को चित्रित करते हुए भी एक दूसरे से जुड़े हैं एवं इस पर्व को समग्रता में प्रस्तुत करते हैं। नव दुर्गा नव रूप काव्य कथा संग्रह शुभ सृजन प्रकाशन से प्रकाशित है।
प्रथम संस्करण 2026 में आई इस पुस्तक का मूल्य 180 रूपये है। इसका आईएसबीएन नंबर 978-81-968088-4-6 है। इस अनोखी व अद्वितीय पुस्तक के लिए आपको अनंत बधाई एवं शुभकामनाएँ।
कविता कोठारी
कवयित्री और अवकाश प्राप्त शिक्षिका,
शिक्षायतन स्कूल, कोलकाता
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