कोलकाता। पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में हर दिन नई-नई जानकारी सामने आ रही है। इसको लेकर प्रदेश के मंत्री पार्थ चटर्जी ईडी के निशाने पर हैं। साथ में उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी पर भी शिकंजा कसा है। अर्पिता मुखर्जी के घर से ही करोड़ों रुपये की नकदी बरामद हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस दिशा में जांच और तेज कर दी है। जांच के दौरान रोज नये नये तथ्य सामने आ रहे है।

इस बीच पता चला है कि अर्पिता मुखर्जी कम से कम 12 शेल कंपनियां चला रही थीं और इन कंपनियों की मदद से ही पैसे की हेराफेरी चल रही थी। इस बीच, भारत सरकार के कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कई कंपनियों के डायरेक्ट पद से अर्पिता मुखर्जी को अयोग्य घोषित कर दिया है। आरोप है कि मुखर्जी ने केवाईसी के नियमों का पालन नहीं किया।

ईडी की जांच में पता चला है कि बंगाल में पार्थ चटर्जी और उनकी महिला सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के पास कई जॉइंट प्रॉपर्टी हैं। ईडी ने खुलासा किया है कि कम से कम तीन कंपनियां ऐसी हैं जिनमें अर्पिता मुखर्जी डायरेक्ट के पद पर हैं। भारत सरकार ने इसी क्रम में कार्रवाई करते हुए डायरेक्ट पोस्ट से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई कंपनी मामलों के मंत्रालय की ओर से की गई है। इसमें एक कंपनी सेंट्री इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड है।

अर्पिता मुखर्जी को इस कंपनी के डायरेक्टर पोस्ट से अयोग्य घोषित किया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री पार्थ चटर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर में बीसी इंटरनेशनल स्कूल के नाम पर बड़ी संपत्ति बनाई थी। अंग्रेजी मीडियम के स्कूल की देखरेख चटर्जी के दामाद के मामा कृष्ण चंद्र अधिकारी कर रहे हैं। इसमें कहा गया है कि पार्थ चटर्जी के घर से क्लास सी और क्लास डी सेवाओं में भर्ती के लिए उम्मीदवारों से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।

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