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पांच राज्यों से आए कलाकारों के साथ सम्मानित हुए भूपेंद्र अस्थाना

सृजन के रंगों में रचा रहा तीन दिवसीय कला उत्सव
 EFAC का 9वाँ वार्षिक कला समारोह का हुआ समापन

लखनऊ। कला की संवेदनशीलता और सृजन की विविधता से सजे ईस्टर्न फेडरेशन ऑफ आर्ट एंड कल्चर (EFAC) के 9वें वार्षिक कला समारोह ने 6 से 8 नवम्बर 2025 तक विद्या ज्ञान स्कूल, सीतापुर में भव्यता के साथ अपने तीन दिवसीय कला उत्सव का समापन किया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी, कला शिविर, कार्यशाला और पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ, जिसने देशभर से आए कलाकारों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों को एक साझा रचनात्मक मंच प्रदान किया।

समारोह की मुख्य अतिथि लखनऊ स्थित फ्लोरेंसेंस आर्ट गैलरी की संस्थापक एवं निदेशिका नेहा सिंह रहीं, जबकि वरिष्ठ कलाकार जयकृष्ण अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

इनके साथ प्रधानाचार्या स्वाति एस. शालिग्राम, EFAC अध्यक्ष प्रदीप्त किशोर दास, उप प्रधानाचार्य कबीर अहमद तथा चित्रकार, क्यूरेटर भूपेन्द्र अस्थाना और चित्रकार अमित वर्मा की उपस्थिति ने आयोजन को और भी गरिमामय बनाया।

तीन दिवसीय कला शिविर में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कला शिविर में देश के विभिन्न प्रांतों से आए ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता के रंग बिखेरे।

इन तीन दिवसीय कला उत्सव में पांच राज्यों से आए कलाकारों ने एक एक कलाकृतियों का सृजन किया साथ ही छात्रों के साथ पेंटिंग और छापाकला का कार्यशाला और कला वार्ता भी आयोजित किया गया था।

एक विशेष कार्यशाला के लिए किरण नादर आर्ट म्यूज़ियम, नई दिल्ली से बंदना अग्रवाल और रिनीलता की उपस्थिति रही, जिन्होंने कला शिक्षण और संग्रहालय प्रथाओं पर अपने विचार साझा किए।

कला शिविर में प्रमुख रहे – अमित कल्ला (जयपुर), अर्चना जेना (बालेश्वर), आर्य प्रज्ञा बस्बदत्ता (बालेश्वर), भूपेन्द्र अस्थाना (लखनऊ), डॉ. नीरजा सी. पीटर्स (नई दिल्ली), डॉ. शगुफ्ता खानम (लखनऊ), नेपोलियन (चेन्नई), प्रतीक मिश्रा (सीतापुर), सस्मिरेखा पात्रा (रांची), टिकम खंडप्पा (जोधपुर) और यतीश कासरगोड (जोधपुर) ने कला, विचार और अनुभूति के इस साझा संवाद ने आयोजन को एक जीवंत रचनात्मक अनुभव में बदल दिया।

समारोह में मुख्य अतिथि ने सभी प्रतिभागी कलाकारों को स्मृति-चिह्न, प्रमाणपत्र और उपहार भेंट किए, वहीं डॉ. सूर्यशांता मोहंती, अंकुर वर्मा, डॉ. नीरजा, सस्मिरेखा और राजकिशोर दिंदा को विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की सराहना करते हुए विशिष्ट अतिथि जयकृष्ण अग्रवाल ने प्रदर्शित कलाकृतियों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि “कला का यह उत्सव विद्यार्थियों और कलाकारों दोनों के लिए प्रेरणादायक है।”

मुख्य अतिथि नेहा सिंह ने कलाकारों से संवाद कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि “ऐसे आयोजन न केवल कला के आदान-प्रदान के मंच हैं, बल्कि यह सीखने और साझा करने की यात्रा भी हैं।”

प्रधानाचार्या स्वाति एस. शालिग्राम ने आयोजन को विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए EFAC टीम की सराहना की। अंत में डॉ. नीरजा पीटर्स ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया और EFAC अध्यक्ष प्रदीप्त दास ने विद्यालय प्रशासन, अतिथियों, कलाकारों और टीम के सभी सदस्यों को इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।

विशेष रूप से रघुनाथ जेना के कुशल संयोजन ने इस कला उत्सव को एक यादगार अनुभव बना दिया, जो भारतीय कला की जीवंतता और संवाद की परंपरा का सुंदर उदाहरण रहा। समापन समारोह पर संगीत, नृत्य और कला का ऐसा समवेत संगम बनी, जहाँ हर सुर और हर रंग एक-दूसरे से संवाद करता प्रतीत हुआ।

शास्त्रीय संगीत की मधुर ध्वनियों और नृत्य की लयात्मक गति के साथ प्रदर्शित कैंप की कलाकृतियाँ मानो उसी भाव-संगीत में झूम उठीं। हर चित्र ने जैसे ताल और अनुभूति का एक साझा राग छेड़ दिया।

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