पहले चरण की 152 सीटों के लिए सोमवार दोपहर तक फ्रीज हो जाएगी वोटर लिस्ट, 60 लाख विचाराधीन मामलों में से 52 लाख का निपटारा, लेकिन अपील का रास्ता लगभग बंद
कोलकाता न्यूज डेस्क | 5 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद और गहरा गया है। SIR के बाद वोटर लिस्ट से 23.4 लाख से अधिक लोगों के नाम हटाए गए हैं।
इन लोगों का भविष्य अब अनिश्चितता में फंस गया है क्योंकि अपील सुनने के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल अभी तक सक्रिय नहीं हो सके हैं।
समय की कमी
पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को प्रस्तावित है और नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा 6 अप्रैल दोपहर 3 बजे तय है। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, इसी समय तक संबंधित सीटों की वोटर लिस्ट भी अंतिम रूप ले लेगी।
यानी पहले चरण की 152 सीटों के लिए वोटर लिस्ट सोमवार दोपहर तक फ्रीज हो जाएगी, जिससे लाखों लोगों के लिए अपील का रास्ता लगभग बंद हो सकता है।
52 लाख मामलों का निपटारा
आंकड़ों के अनुसार, ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखे गए 60 लाख से अधिक मामलों में से करीब 52 लाख का निपटारा किया जा चुका है। इसके लिए 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी, जिन्होंने फरवरी के अंत से प्रक्रिया शुरू की थी।
इनमें से लगभग 55 प्रतिशत मामलों को सही पाते हुए मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया, जबकि 45 प्रतिशत मामलों को खारिज कर दिया गया।
ट्रिब्यूनल की अनुपस्थिति
यही 45% मामले अब विवाद का केंद्र बन गए हैं। करीब 23.4 लाख लोग अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो चुके हैं और उन्हें अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील करने का अधिकार है।
लेकिन ट्रिब्यूनल के संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा और रिटायर्ड जजों की नियुक्ति अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दफ्तरों में बढ़ी भीड़
इस बीच, सरकारी दफ्तरों में अपील दाखिल करने के लिए लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। कई जगहों पर लोगों को दस्तावेजों की कमी या अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर लौटा दिया गया।
पहले जहां कहा गया था कि ऑफलाइन अपील के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जरूरी नहीं होंगे, वहीं अब लोगों से फिर से कागजात लाने को कहा जा रहा है, जिससे भ्रम के हालात बने हुए हैं।
8 हजार अपीलें पहुंचीं
अधिकारियों का कहना है कि अब तक करीब 8,000 अपीलें संबंधित प्राधिकरणों के पास पहुंच चुकी हैं, जिन्हें आगे की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारियों को भेजा गया है।
हालांकि, ट्रिब्यूनल के काम शुरू होने में देरी ने लाखों मतदाताओं की चिंता बढ़ा दी है, जो समय रहते न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
चुनाव आयोग पर दबाव
चुनाव आयोग पर अब दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया में जानबूझकर नाम काटे जा रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस इसे “भाजपा की साजिश” बता रही है।
भाजपा ने इसे “घुसपैठियों और अवैध मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया” बताया है।
चुनावी माहौल
यह विवाद ऐसे समय में और गहरा गया है जब नामांकन की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है।
अगर ट्रिब्यूनल समय पर सक्रिय नहीं हुए तो 23.4 लाख से ज्यादा लोग अपने वोटिंग अधिकार से वंचित रह सकते हैं, जो चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।



