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बंगाल में प्रशासनिक अधिकार का दुरुपयोग, वोटर वेरिफिकेशन में हेराफेरी की कोशिश: सुवेंदु

कोलकाता | 30 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बीच राजनीतिक घमासान तेज़ हो गया है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया में जानबूझकर हेराफेरी करने के गैर-कानूनी निर्देश जारी किए जा रहे हैं, जो तृणमूल कांग्रेस और प्रशासन के कथित गठजोड़ को उजागर करते हैं।


ADM के कथित WhatsApp मैसेज ने बढ़ाया विवाद

सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि साउथ 24 परगना के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) की ओर से अधिकारियों को आपत्तिजनक निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने पोस्ट में लिखा, “एसआईआर प्रक्रिया में चौंकाने और बेशर्म ‘टीएमसी-ममता प्रशासन का गठजोड़’ सामने आया है। साउथ 24 परगना के ADM द्वारा भेजा गया कथित व्हाट्सएप मैसेज चुनावी लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के पीछे की सच्चाई उजागर करता है।”


‘Not Verified’ पर क्लिक न करने का दबाव!

सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, ADM के कथित संदेश में अधिकारियों से कहा गया है— “किसी भी परिस्थिति में ‘Not Verified’ ऑप्शन पर क्लिक न करें। किसी भी कन्फ्यूजन की स्थिति में मुझसे या OC Election से बात करें। हर हाल में रोज़ाना 3000 वेरिफिकेशन का टारगेट पूरा करना है।”

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया को जबरन पूरा दिखाने और फर्जी या संदिग्ध मतदाताओं को बचाने की सीधी कोशिश है।


“यह खुला गैर-कानूनी आदेश है”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “अधिकारियों को जानबूझकर ‘Not Verified’ मार्क न करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, भले ही सही तरीके से वेरिफिकेशन हुआ हो या नहीं। यह प्रशासनिक अधिकार का खुला दुरुपयोग है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर अयोग्य मतदाताओं और फर्जी एंट्रीज़ को छिपाने के लिए किया जा रहा है, ताकि टीएमसी की वोटबैंक राजनीति सुरक्षित रहे।


“चुनाव आयोग के आदेशों को कमजोर कर रही है ममता सरकार”

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार भारत के चुनाव आयोग के साफ और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने के निर्देशों को विफल करने की कोशिश कर रही है

उन्होंने आरोप लगाया, “टीएमसी को डर है कि असली और निष्पक्ष एसआईआर उनकी वर्षों से चल रही चुनावी धांधली को उजागर कर देगा। इसलिए जिला प्रशासन को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।”


चुनाव आयोग से उच्च-स्तरीय जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव आयोग से मांग की कि—

  • इस तरह के अनौपचारिक प्रशासनिक दबाव का तुरंत संज्ञान लिया जाए
  • संबंधित ADM और अन्य अधिकारियों की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए
  • लोकतंत्र को कमजोर करने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल बंगाल नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है

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