कोलकाता न्यूज़ डेस्क | 22 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी गतिरोध के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने कमान संभाली है।
मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें राज्य के प्रशासनिक और चुनावी शीर्ष अधिकारियों के साथ कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई।
न्यायिक निगरानी में होगा डेटा का मिलान
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, अब मतदाता सूची में मौजूद तार्किक विसंगतियों और दावों का निपटारा जिला न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में किया जाएगा।

इस अभूतपूर्व आदेश के क्रियान्वयन के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों की छुट्टियां 9 मार्च तक रद्द कर दी हैं।
छुट्टियां रद्द, प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थगित
विशेष परिस्थितियों और चिकित्सा आपातकाल को छोड़कर किसी भी न्यायाधीश या न्यायिक अधिकारी को अवकाश नहीं मिलेगा।
न्यायिक अकादमी में होने वाले सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी स्थगित कर दिए गए हैं।
अवकाश पर गए अधिकारियों को 23 फरवरी तक काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है, ताकि 28 फरवरी को मतदाता सूची के प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद हाई कोर्ट की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच ‘अविश्वास’ की स्थिति पर चिंता जताई थी। अब मतदाता सूची की विसंगतियों को दूर करने का जिम्मा न्यायिक अधिकारियों पर है।
बैठक में राज्य के प्रशासनिक और चुनावी शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यह कदम चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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