कोलकाता, 12 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चुनाव आयोग और ममता बनर्जी सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। आयोग ने राज्य सरकार से 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की डिटेल्ड बैकग्राउंड जानकारी मांगी थी, लेकिन गुरुवार सुबह तक राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया। इससे सियासी तापमान और बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आयोग ने इन अधिकारियों की स्थिति संदेहास्पद होने पर विस्तृत जानकारी मांगी थी।
सूत्रों ने कहा, “ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों पर सुनवाई के सेशन 14 फरवरी को पूरे होने में सिर्फ दो दिन बचे हैं, इसलिए इन 8,505 अधिकारियों में से किसी के भी सुनवाई प्रोसेस में शामिल होने की संभावना बहुत कम है।

उनमें से कुछ 14 फरवरी से 21 फरवरी तक डॉक्यूमेंट की जांच और निपटान के दौरान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि राज्य सरकार इन अधिकारियों की पहचान को कितना स्पष्ट करती है।”
संदेहास्पद नाम और आरोप
सूत्रों का कहना है कि आयोग को कुछ जानकारियां मिली हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ अपर-डिवीजन क्लर्क और यहां तक कि टाइपिस्ट के नाम भी उन 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हैं।
ऐसी भी जानकारी है कि एक रिटायर्ड राज्य सरकार के कर्मचारी का नाम भी उसी लिस्ट में शामिल किया गया था। चुनाव आयोग ने संदेहास्पद नामों पर उनके बैकग्राउंड की जानकारी राज्य सरकार और उनसे जुड़े राज्य सरकार के संबंधित विभागों से मांगी थी।
फाइनल मतदाता सूची और चुनाव की तैयारी
फाइनल मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी होगी। इसके अगले दिन चुनाव आयोग की पूरी बेंच SIR के बाद के हालात का जायजा लेने के लिए दो दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंचेगी। उसके तुरंत बाद भारतीय निर्वाचन आयोग राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
- भाजपा: सुवेंदु अधिकारी ने कहा – “ममता सरकार SIR में बाधा डाल रही है। अधिकारियों की जानकारी छिपाना घोटालों का संकेत है। चुनाव आयोग का कदम सही है, फर्जी वोटर बचाने की कोशिश नाकाम होगी।”
- TMC: अभिषेक बनर्जी ने कहा – “चुनाव आयोग TMC को निशाना बना रहा है। हम अधिकारियों की जानकारी दे चुके हैं। यह राजनीतिक साजिश है, हम अदालत में लड़ेंगे।”
यह विवाद 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है। चुनाव आयोग की सख्ती से SIR प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
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