Bengal Sir

बंगाल SIR: पूर्व नवाब मीर जाफर के 346 वंशजों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए

कोलकाता न्यूज डेस्क | 01 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया ने एक और बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मुर्शिदाबाद जिले में पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के करीब 346 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।

इस घटना ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मतदाता अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर बहस तेज हो गई है।

परिवार के कई सदस्यों के नाम गायब

प्रभावित परिवार 15वीं और 16वीं पीढ़ी से संबंधित बताया जा रहा है, जिससे यह मामला ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से भी अहम हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के लालबाग क्षेत्र में स्थित नव आदर्श हाई स्कूल के बूथ संख्या 121 से नवाबी परिवार के कई सदस्यों के नाम गायब पाए गए हैं।

इनमें 82 वर्षीय सैयद रजा अली मिर्जा (छोटे नवाब) और उनके पुत्र सैयद मोहम्मद फहीम मिर्जा शामिल हैं। फहीम मिर्जा तृणमूल कांग्रेस से जुड़े पार्षद हैं।

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फहीम मिर्जा ने दावा किया कि उनका नाम वर्ष 2002 से मतदाता सूची में था, लेकिन इस बार सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। नवाब परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम को “ऐतिहासिक विडंबना” बताते हुए नाराजगी जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Bengal Names of 346 Descendants of Former Nawab Mir Jafar Removed from Voter List

SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

यह घटना SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रही है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि लंबे समय से सूची में शामिल लोगों के नाम अचानक कैसे हटाए गए और इसके पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई। कई लोग इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

TMC और कांग्रेस दोनों ही दलों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। ममता बनर्जी सरकार ने पहले ही SIR प्रक्रिया को “लोकतंत्र पर हमला” करार दिया था। अब यह मामला मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल जिला है।

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भाजपा ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी इसे “ECI की पारदर्शी प्रक्रिया” बता सकती है।

चुनावी मायने

मुर्शिदाबाद जिले में मुस्लिम आबादी 66% से ज्यादा है। ऐसे में 346 नाम हटने से स्थानीय चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। विशेषकर उन सीटों पर जहां मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाता है।

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