कोलकाताः पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को कथित रूप से उनकी भाषा के कारण बांग्लादेशी समझकर प्रताड़ित करने का मामले कई राज्यों से सामने आ रहा है। कुछ दिन दिल्ली में बीरभूम के छह प्रवासी मजदूरों को कथित रूप से बांग्लादेशी होने के शक में पकड़ा गया था।
इस संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट में मामला दायर किया गया है। ओड़िशा में भी पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को प्रताड़ित किया गया। अब तमिलनाडु में भी ऐसा ही मामले सामने आया है।
- क्या है घटनाः
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के चार प्रवासी श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि इस महीने की शुरुआत में तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थानीय लोगों ने बंगाली भाषा में बात करने पर उन पर हमला किया। स्थानीय लोगों ने संदेह जताया कि वे बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी हैं। इन लोगों ने 18 जुलाई को मुर्शिदाबाद में पुलिस के पास शिकायत दर्ज करायी।
दर्ज पुलिस शिकायत के अनुसार, घटना 15 जुलाई की है। सुजान शेख, उनके भाई मिलन शेख, साहिल शेख और बाबू शेख काम की तलाश में लगभग तीन सप्ताह पहले चेन्नई गए थे। तिरुवल्लूर में एक निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे।
बंगाली में बात करते सुना, तो वहां के स्थानीय लोगों ने विरोध किया। उन्हें लोहे की छड़ों और डंडों से पीटना शुरू कर दिया। उन मजदूरों पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगा रहे थे।
मज़दूरों को पहले इलाज के लिए तिरुवल्लूर के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया। कथित हमले में सुजान का हाथ टूट गया। उसे सर्जरी करानी पड़ी। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले चेन्नई में स्थानीय पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि घर लौटने से पहले उन्हें 11 दिनों के काम का भुगतान नहीं किया गया।
मुर्शिदाबाद पुलिस ने शिकायत मिलने की बात बतायी है। उन्होंने कहा कि वे तमिलनाडु पुलिस के संपर्क में हैं। गौरतलब हो कि पश्चिम बंगाल से हजारों मजदूर निर्माण, कपड़ा और आतिथ्य क्षेत्रों में काम करने के लिए हर साल तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों में प्रवास करते हैं।
- तूल पकड़ रहा भाषाई विवाद
बता दें कि इन दिनों पश्चिम बंगाल में अन्य राज्यों में बंगाली भाषी प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। इस महीने की शुरुआत में, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि हरियाणा, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में बंगालियों को भेदभाव और “भाषाई भेदभाव” का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद बांग्लादेश सीमा पार भेजा जा रहा है।
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