कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मायापुर स्थित इस्कॉन के वैश्विक आध्यात्मिक मुख्यालय चंद्रदया मंदिर में गुरुवार से शुरू हुए महीने भर चलने वाले होली महोत्सव में विश्व के 92 देशों के भक्त शामिल हुए। महीने भर चलने वाले समारोहों में श्रवण उत्सव, कीर्तन मेला और एक सप्ताह तक चलने वाला नवद्वीप मंडल परिक्रमा शामिल था। इस्कॉन के प्रवक्ता सुब्रतो विश्वास ने बताया कि मायापुर में गौर पूर्णिमा के मौके पर पारंपरिक धोती-कुर्ता और घाघरा-चोली पहने दुनिया भर में करीब एक लाख भक्तों और तीर्थयात्रियों का संगम देखा गया। उन्होंने बताया कि यह उत्सव भगवान चैतन्य महा प्रभु की 536 वीं जयंती मनाने के लिए गायन, नृत्य एवं मंत्रोच्चार करते हुए मनाया गया।

उन्होंने कहा कि हजारों लोगों को रंग, पंथ, क्षेत्र, जाति और देश की बेड़ियों को तोड़ते हुए इसमें लीन हो गए जो मंत्रमुग्ध कर देने वाला नजारा था, जहां लोग शाश्वत आनंद के सागर में डूबे नजर आ रहे थे। महीने भर चलने वाले इस उत्सव में कई कार्यशालाएं शामिल थीं जिनका आयोजन वरिष्ठ भक्तों द्वारा वर्तमान परिदृश्य में महाप्रभु की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर चर्चा करने के लिए किया गया था। कई प्रदर्शनियां आयोजित की गईं और महाप्रभु के जीवन को प्रदर्शित करने वाले विभिन्न देशों के तीर्थयात्रियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राज्य में आज सभी मंदिर परिसर को बहुरंगी फूलों से भव्य रूप से सजाया गया और चमकदार रोशनी से जगमगाया हुआ था। इसकी शुरुआत मंगलारती से हुई और फिर सुबह दर्शन आरती हुई। शाम को करतालों की ध्वनि, शंखनाद, मृदंगों की थाप, ढोल आदि के बीच पंचतत्व के देवताओं का महाभिषेक किया गया। इसके अलावा संगीत वाद्ययंत्रों के साथ भक्तों द्वारा महा-मंत्र के जाप से हवा गूंज उठी।

चैतन्य चरितामृत, महाप्रभु की जीवनी में उल्लेख किया गया है कि भगवान ने पूर्वाभास किया था कि उनकी शिक्षाओं को दुनिया भर में फैलाया गया और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद ने इसे एक वास्तविकता में बदल दिया। संस्था के सभी केन्द्रों पर गौर पूर्णिमा पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है।

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