फोटो साभार : गूगल

आसनसोल : देशव्यापी लॉकडाउन शुरू हुए 19 दिन बीत चुके है, लॉकडाउन के शुरूआती दौर में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों की आवाजाही होते देख उनपर रोक लगाने के लिए सभी राज्यों की सीमाएं सील कर दी गयी। लेकिन परदेश में रहकर खाने-कमाने वाले कुछ लोगों में इन दिनों जल्द घर पहुंचने की ऐसी बेचैनी छायी है कि वे खुद का जान तो जोखिम में डाल ही रहे है, दूसरों के लिए भी मुसीबत बने हुए है।

रविवार को ऐसे ही चार लोग नयी दिल्ली- कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग पर डिबुडीह चेकपोस्ट के निकट दिखे। वह लोग साइकिलों पर ही बैग और बर्तन वगैरह बांध कर करीब चार दिनों पहले उत्तरप्रदेश के चुनार से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद को निकले है। राज्यों की सीमाएं सील होने के बावजूद ये लोग तीन राज्यों की सीमाओं को पार कर करीब 500 किमी की दूरी तय कर चुके है। हालांकि अब अपने ही प्रदेश की सीमा पर अडंगा लग गया।

डिबुडीह चेकपोस्ट में तैनात पुलिस वालों ने उन्हें वापस झारखंड की ओर लौटने का फरमान सुना दिया। इसके बाद चारों लोग बराकर पुल के बगल में एक पेड़ की छाया में बैठकर आगे बढ़ने की जुगत भिड़ाते दिखे। उनमें शामिल रियाजुल हक ने कहा कि वह सभी लोग चुनार में प्लास्टिक का डिब्बा बेचते है।

वैसे तो वर्ष में एक ही बार घर जाते है, लेकिन लॉकडाउन में कामकाज बंद पड़ा है तो बेकार कब तक बैठकर खाते रहे इसलिए अपने लोगों के बीच घर को लौट जाना चाहते है। बड़ी मुश्किल से यूपी से बिहार व उसके बाद झारखंड सीमा पार किया। अब कोई न कोई उपाय कर रात तक यहां से भी आगे बढ़ेंगे अभी भी 250 किमी का रास्ता तय करना है।

मालूम हो कि लॉकडाउन शुरू होने के बाद तो हजारों- हजार की संख्या में मजदूरों का आना- जाना लगा रहा। लेकिन राज्यों की सीमाएं सील करने के बाद इनका आना जाना लगभग बंद हो गया था।

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