कोलकाता | 8 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर, जिन्होंने कुछ दिन पहले संकेत दिया था कि वे विधायक पद छोड़ देंगे, अब अपने बयान से पलट गए हैं। सोमवार को उन्होंने साफ कहा कि वे विधानसभा से इस्तीफा नहीं देंगे।
यह बयान उस विवाद के बाद आया है जिसमें उन्होंने मुर्शिदाबाद के बेल्डंगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद की आधारशिला रखी थी, जिसके चलते उन्हें टीएमसी ने निलंबित कर दिया था।
🗣️ “अब इस्तीफे का कोई सवाल नहीं”
भरतपुर से विधायक कबीर ने मीडिया से कहा— “अब मेरे इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं है। मैं विधायक पद से इस्तीफा नहीं दे रहा हूं।”

- उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र के लोगों ने उनसे पद न छोड़ने की अपील की है। “लोगों ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना है। वे नहीं चाहते कि मैं इस्तीफा दूं। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए मैंने फैसला किया है।”
कुछ दिन पहले कबीर ने कहा था कि वे टीएमसी से इस्तीफा देंगे और नई पार्टी बनाकर 2026 के चुनाव में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। अब उनके इस नए रुख ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।
🔥 विवाद की पृष्ठभूमि
- कबीर ने 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से मस्जिद का शिलान्यास करने की घोषणा की थी।
- इस बयान ने राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया।
- टीएमसी ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ बताते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
- भाजपा और राज्यपाल ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
🏛️ राजनीतिक असर: टीएमसी और विपक्ष दोनों की नजरें कबीर पर
कबीर के इस नए बयान से— टीएमसी के लिए स्थिति और जटिल हो सकती है, क्योंकि पार्टी पहले ही उनसे दूरी बना चुकी है।
- भाजपा इसे “टीएमसी की अंदरूनी असहमति” के रूप में पेश कर सकती है।
- 2026 के चुनाव से पहले यह विवाद बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
✅ निष्कर्ष
हुमायूं कबीर का यू-टर्न बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। क्या वे टीएमसी में वापसी की कोशिश कर रहे हैं या अपनी नई राजनीतिक रणनीति बना रहे हैं। यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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