कोलकाता, 29 अगस्त 2025 : आगामी लोकसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बूथ स्तर पर बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के बूथ सशक्तीकरण अभियान में अनियमितताएं सामने आई हैं, और रिपोर्ट्स के अनुसार 60% बूथ कमेटियों के गठन का दावा किया गया है, जबकि ज़मीनी स्तर पर 40–45% बूथों पर ही कार्य पूर्ण हो पाया है।
भाजपा ने बंगाल में 30 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, लेकिन बूथ एजेंटों की भारी कमी, संपर्क में असमर्थता, और गलत मोबाइल नंबरों जैसी समस्याएं अभियान को कमजोर कर रही हैं।
📉 क्या है समस्या की जड़?
- पार्टी ने दावा किया है कि राज्य के 60% बूथों पर कमेटियाँ गठित हो चुकी हैं, लेकिन ज़मीनी रिपोर्ट्स के अनुसार यह आंकड़ा 40–45% तक ही सीमित है।
- कई बूथों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं से संपर्क नहीं हो पा रहा, और उपलब्ध मोबाइल नंबर भी गलत या निष्क्रिय पाए गए हैं।
- बूथ एजेंटों की नियुक्ति, जो मतदाता सूची की निगरानी और मतदान के दिन की रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं, अभी अधूरी है।
🧭 चुनावी रणनीति पर असर
भाजपा ने बंगाल में 30+ सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, लेकिन बूथ स्तर की कमजोरी से प्रचार, मतदाता संपर्क और मतदान प्रबंधन प्रभावित हो सकता है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई को जमीनी संगठन को मजबूत करने, स्थानीय मुद्दों पर जन आंदोलन चलाने, और राज्य सरकार की योजनाओं की समीक्षा करने की सलाह दी है।
🆚 ममता बनर्जी की जवाबी चाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में ‘आमादेर पारा, आमादेर समाधान’ योजना की घोषणा की है, जिसके तहत हर बूथ को ₹10 लाख तक की राशि आवंटित की जा रही है। यह योजना स्थानीय विकास और जनसंपर्क को बढ़ावा देती है, जिससे TMC का बूथ नेटवर्क और मजबूत हो रहा है।
📊 राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में चुनावी जीत का रास्ता बूथ स्तर की मजबूती से होकर जाता है। भाजपा यदि समय रहते बूथ एजेंटों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, और स्थानीय संपर्क को दुरुस्त नहीं करती, तो उसका चुनावी प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
पार्टी के केंद्रीय नेताओं ने राज्य इकाई को जमीनी संगठन को मजबूत करने और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर जन आंदोलन चलाने की सलाह दी है।
वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हर बूथ को ₹10 लाख आवंटित कर ‘आमादेर पारा, आमादेर समाधान’ योजना शुरू की है, जिससे भाजपा की रणनीति को और चुनौती मिल रही है।
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