कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। इस फैसले पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पश्चिम बंगाल में नीट-यूजी (मेडिकल और डेंटल) काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए रोकने के फैसले पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री और पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला है।
- 🗣️ सुकांत मजूमदार का बयान
केंद्रीय मंत्री ने कहा: “बंगाल सरकार छात्रों के भविष्य से खेल रही है। यह निर्णय शिक्षा विरोधी है और युवाओं के सपनों को कुचलने जैसा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार जानबूझकर केंद्र की योजनाओं को बाधित कर रही है।
मजूमदार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना साझा करते हुए लिखा कि ‘‘अति आवश्यक सूचना’’ के नाम पर बिना कोई ठोस कारण बताए काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के मेडिकल छात्रों का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया गया है।
📋 क्या है मामला?
- बंगाल सरकार ने NEET काउंसलिंग प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है
- कारण बताया गया है तकनीकी गड़बड़ियाँ और दस्तावेज़ सत्यापन में देरी
- छात्रों और अभिभावकों में बढ़ रही है चिंता
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, तो इसे अचानक क्यों रोका गया। क्या यह किसी विशेष समूह को आरक्षण के नाम पर अनुचित लाभ देने का प्रयास है?
राज्य सरकार के डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन की अधिसूचना में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल नीट-यूजी मेडिकल और डेंटल 2025 काउंसलिंग/एडमिशन प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है। हालांकि, इसके पीछे कोई कारण स्पष्ट नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला ओबीसी प्रमाणपत्र से जुड़े विवाद के कारण लिया गया है, जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है। इसी विवाद की वजह से पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (डब्ल्यूबीजेईई) के परिणाम भी रुके हुए हैं।
हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कौशिक चंद्र ने प्रकाशित मेरिट सूची को रद्द कर 15 दिनों के भीतर 2010 से पहले की 66 ओबीसी जातियों की सूची के आधार पर नई मेरिट सूची बनाने का आदेश दिया था।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि ओबीसी छात्रों को पहले की तरह सात प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया जाए।
इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन 11 अगस्त को समयाभाव के चलते मामले की सुनवाई एक महीने के लिए टाल दी।
ऐसे में हाई कोर्ट का आदेश फिलहाल प्रभावी है। इस पूरे विवाद के चलते राज्य में मेडिकल और इंजीनियरिंग दोनों प्रवेश प्रक्रियाएं प्रभावित हो गई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
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