West bengal tmc wall graffiti

डिजीटल युग में भी राजनीतिक लड़ाई का सबसे पुराना और असरदार मैदान बनी ‘दीवारें’

कोलकाता, 24 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ते ही डिजिटल कैंपेन की बाढ़ आ गई है, लेकिन बंगाल की गलियों-मोहल्लों में दीवारों पर उकेरे गए राजनीतिक कार्टून, स्लोगन और वॉल आर्ट आज भी अपनी अहमियत बनाए हुए हैं।

जहाँ एक तरफ सोशल मीडिया पर हैशटैग की लड़ाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर ‘वॉल राइटिंग’ के जरिए मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की होड़ भी जारी है।

भाजपा: समर्पण और लगन

भाजपा प्रवक्ता पृथ्वीराज मुखर्जी कहते हैं: “हमारी पार्टी में यह काम सदस्य अपनी मर्जी और लगन से करते हैं, जिसके लिए कोई भुगतान नहीं लिया जाता। हम इसे ‘बंगाल की राजनीतिक विरासत’ मानते हैं।

Bengal poll graffiti

TMC: प्रोफेशनल पेंटर्स और भुगतान

TMC के समर्थक और व्यवसायी सैबल दे स्वीकार करते हैं: “हम प्रोफेशनल पेंटर्स की मदद लेते हैं और पार्टी इसके लिए भुगतान करती है, खासकर सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए।

पुराना दौर vs नया दौर

15 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय स्कूल शिक्षक अमित दास कहते हैं: “अब यह काम केवल शौक नहीं रहा, बल्कि इसमें पेशेवर पहलू भी जुड़ गया है और पेंटर्स को उनके काम के पैसे मिलते हैं।

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Nadia a bjp supporter paints partys logo on a wall

वामपंथी खेमे के अरिजीत चौधरी 1989 के दौर को याद करते हुए बताते हैं: “CPI(M) वर्कशॉप आयोजित कर कार्यकर्ताओं को ब्रश पकड़ने और कैलीग्राफी की बारीकियां सिखाती थी।

डिजिटल युग में भी दीवारों की ताकत

डिजिटल पोस्टरों और सोशल मीडिया के इस युग में भी बंगाल की दीवारों पर बना ‘वॉल आर्ट’ आज भी राजनीतिक अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त और पारंपरिक माध्यम बना हुआ है। सड़क के कोने-कोने पर बने स्लोगन, कार्टून और चित्र आज भी वोटर के मन-मस्तिष्क पर सीधा असर डाल रहे हैं।

Cpim wall

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