कोलकाता, 19 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे को लेकर हुए प्रोटोकॉल विवाद की गूंज अब ST (अनुसूचित जनजाति) आरक्षित सीटों तक पहुंच गई है। बीजेपी ने दावा किया है कि राष्ट्रपति के साथ हुए कथित अपमान का असर राज्य की 16 ST आरक्षित सीटों पर पड़ सकता है।
प्रोटोकॉल विवाद और बीजेपी का आरोप
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगा था। बीजेपी ने कहा कि आदिवासियों का अपमान हुआ है।
इसके बाद TMC और BJP के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। बीजेपी का मानना है कि इस विवाद का असर ST आरक्षित सीटों पर होगा, क्योंकि राष्ट्रपति स्वयं ST समुदाय से हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा – “आदिवासियों का अपमान हुआ है, राष्ट्रपति के साथ प्रोटोकॉल उल्लंघन शर्मनाक है।”
वही BJP नेता दिलीप घोष कहते हैं – “इस विवाद का असर ST आरक्षित 16 सीटों पर पड़ सकता है, आदिवासी वोटर नाराज हैं।”
टीएमसी का पलटवार
टीएमसी ने इस पूरे विवाद को “राजनीतिक साजिश” और “BJP का चुनावी एजेंडा” करार दिया है। उन्होंने बार-बार कहा कि कोई प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ।
ममता बनर्जी ने नए राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात के दौरान कहा था- “बंगाल उनसे प्यार करता है जो बंगाल से प्यार करते हैं।”
वही, TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि “TMC आदिवासी समुदाय का सम्मान करती है, BJP सिर्फ राजनीति कर रही है।”
TMC का तर्क दिया कि कार्यक्रम प्राइवेट आयोजकों और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित था, राज्य सरकार इसमें शामिल नहीं थी। BJP बंगाल को निशाना बना रही है और चुनाव से पहले झूठ फैला रही है।”
उन्होंने एक पुरानी तस्वीर दिखाकर कहा कि PM मोदी भी राष्ट्रपति के सामने बैठे थे, तो BJP ही संवैधानिक पद का अपमान करती है, TMC नहीं।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद BJP को उत्तर बंगाल और आदिवासी बहुल इलाकों में फायदा दे सकता है, लेकिन पूरे राज्य पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। TMC का “ममता vs BJP” नैरेटिव और मुस्लिम-महिला वोट बैंक अभी भी मजबूत है।
- ज्यादातर विश्लेषक मानते हैं कि TMC का बचाव तकनीकी रूप से सही है क्योंकि कार्यक्रम प्राइवेट था।
- लेकिन BJP को राजनीतिक फायदा मिल सकता है, खासकर ST आरक्षित सीटों पर, क्योंकि राष्ट्रपति ST समुदाय से हैं।
- असर सीमित लेकिन संभावित – TMC का “दिदी” इमेज और मुस्लिम-महिला वोट बैंक मजबूत है, लेकिन उत्तर बंगाल और आदिवासी इलाकों में BJP को फायदा मिल सकता है।
16 ST आरक्षित सीटों पर पुराना मुकाबला
पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जनजाति के लिए कुल 16 सीटें आरक्षित हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर TMC और BJP के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था:
- TMC ने 9 सीटें जीतीं
- BJP को 7 सीटें मिलीं
2024 के लोकसभा चुनाव में भी इन क्षेत्रों में TMC ने 9 और BJP ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की।
वोट शेयर और जीत का अंतर
बंगाल में ST आरक्षित सीटों पर TMC का कुल वोट शेयर BJP से मामूली रूप से अधिक रहा है, लेकिन BJP की जीत का अंतर अक्सर उससे कहीं अधिक रहा है। बीजेपी का दावा है कि राष्ट्रपति दौरे के विवाद से ST समुदाय में नाराजगी फैल सकती है, जिसका फायदा BJP को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक शिखा मुखर्जी कहती हैं- “यह मुद्दा BJP को ट्राइबल वोटरों में भावनात्मक कनेक्ट बनाने का मौका देगा।”
कुल मिलाकर, TMC इस मुद्दे को BJP की साजिश बताकर नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है, जबकि BJP इसे आदिवासी अपमान का बड़ा नैरेटिव बना रही है। चुनावी रैलियों और जमीनी कैंपेन से असल असर पता चलेगा।
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