कोलकाता, 24 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ECI) ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 73 रिटर्निंग अधिकारियों (ROs) को हटा दिया है। राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और हर सीट के लिए आमतौर पर एक RO नियुक्त किया जाता है।
इस फैसले से ECI और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव का नया मोर्चा खुल गया है।
क्या है पूरा मामला?
आयोग ने सोमवार रात इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इससे राज्य में कुल ROs में से लगभग 26 प्रतिशत को बदल दिया गया है। राज्य सरकार और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पहले से ही आयोग के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
यह विरोध राज्य कैडर के कई नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले को लेकर है, जिनमें पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पूर्व राज्य गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा, पूर्व कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस के पूर्व कमिश्नर सुप्रतिम सरकार जैसे नाम शामिल हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट में PIL
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें राज्य कैडर के कई शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले के ECI फैसले को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने सोमवार को प्रारंभिक सुनवाई की। बेंच ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की है।
ECI के वकील ने कोर्ट को बताया कि नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादले हर राज्य में जमीनी स्तर की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग होते हैं।
उन्होंने दलील दी कि हालांकि आयोग के पास असीमित अधिकार नहीं हैं, लेकिन उसके पास यह अधिकार जरूर है कि वह मतदान प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त रहे, इसके लिए जरूरी फैसले ले सके।
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