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ओवैसी-कबीर गठबंधन बिगाड़ सकता सकता है ममता का चुनावी समीकरण!

कोलकाता न्यूज डेस्क | 25 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब सिर्फ एक महीने से भी कम दूर है। इस बीच AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के बीच हुआ गठबंधन राजनीतिक हलचल का केंद्र बन गया है।

हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि उनकी पार्टी राज्य की करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि AIMIM कुछ चुनिंदा सीटों पर। दोनों ने मिलकर मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश शुरू कर दी है।

हुमायूं कबीर ने साफ कहा, “मैं बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए हूं और असदुद्दीन ओवैसी गैर-बंगाली मुसलमानों के लिए हैं।” उन्होंने आगे दावा किया कि उनकी और ओवैसी की जोड़ी ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर कर देगी।

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मुस्लिम वोट बैंक: TMC की सबसे बड़ी ताकत

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी लगभग 27-30 प्रतिशत है। 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने मुस्लिम वोट का 70-80 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया था, जिसकी बदौलत पार्टी ने 215 सीटें जीतीं।

मुर्शिदाबाद (66%), मालदा (51%), उत्तर दिनाजपुर (50%), दक्षिण 24 परगना (36%) और बीरभूम (37%) जैसे जिलों में मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों की करीब 85-110 सीटों पर मुस्लिम आबादी 25% से अधिक है।

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शिवसेना UBT सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार, “जब भी भाजपा मुश्किल में होती है, वह AIMIM को बुलाती है, जो उसके ‘स्पीड डायल’ पर रहती है।”

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TMC की जीत का सबसे बड़ा आधार यही मुस्लिम वोट बैंक रहा है। अगर यह वोट बैंक बंटता है, तो TMC की कई सीटें खतरे में पड़ सकती हैं।

गठबंधन का संभावित असर

विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल इलाकों में TMC के वोट काटेगा। अगर गठबंधन 4-8% मुस्लिम वोट भी काट ले, तो निम्नलिखित प्रभाव पड़ सकता है:

    • TMC को नुकसान: 10 से 22 सीटों तक का संभावित नुकसान, खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में।
    • BJP को फायदा: मुस्लिम वोट बंटने से BJP को अप्रत्यक्ष लाभ होगा। 2021 में BJP ने 77 सीटें जीती थीं। अगर TMC का वोट शेयर 5% भी गिरता है, तो BJP को 15-25 अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं।
    • कांग्रेस और वामपंथी: इन दलों को भी मामूली नुकसान हो सकता है, लेकिन उनका आधार पहले से ही कमजोर है।
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राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, “यह गठबंधन TMC के मुस्लिम वोट बैंक को बांटने की कोशिश है। अगर यह 4-6% वोट भी काट लेता है, तो TMC की कई कांटे की सीटें BJP के पाले में जा सकती हैं। लेकिन बंगाल के मुस्लिम वोटर अभी भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं।”

गठबंधन की कमजोरियां

  • AIMIM का बंगाल में आधार बहुत सीमित है। 2021 में पार्टी ने राज्य में लगभग शून्य वोट पाए थे।
  • हुमायूं कबीर की AJUP अभी नई पार्टी है और इसका संगठन जिला स्तर तक भी पूरी तरह नहीं फैला है।
  • बंगाल के मुस्लिम वोटर अक्सर “BJP को रोकने” की रणनीति अपनाते हैं। वे TMC को मजबूत बनाने के लिए वोट देते हैं, ताकि भाजपा सत्ता में न आए।
  • ओवैसी की छवि “ध्रुवीकरण” वाली मानी जाती है, जिससे कुछ मुस्लिम वोटर उनसे दूरी बना सकते हैं।

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राजनीतिक विश्लेषक शिखा मुखर्जी के अनुसार “ओवैसी की पार्टी बंगाल में नई है। अगर वे स्थानीय मुद्दों पर फोकस करेंगे तो कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन मुस्लिम वोटर ‘BJP को हराने’ की रणनीति अपनाते हैं। इसलिए गठबंधन का असर सीमित रहने की संभावना ज्यादा है।”

BJP की रणनीति

भाजपा नेता दिलीप घोष ने साफ कहा है कि “ओवैसी TMC का वोट काटेंगे, BJP को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।” BJP इस गठबंधन को “TMC के खिलाफ वोट कटवाने की साजिश” बता रही है और उम्मीद कर रही है कि इससे उसकी सीटें बढ़ेंगी।

निष्कर्ष

हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी का गठबंधन TMC के चुनावी समीकरण को बिगाड़ सकता है, लेकिन पूरी तरह बिगाड़ने की क्षमता अभी नहीं दिख रही है। असर मुख्य रूप से 40-60 मुस्लिम बहुल सीटों पर दिखेगा।

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अगर गठबंधन स्थानीय मुद्दों पर मजबूत प्रचार कर पाता है, तो TMC को 10-18 सीटों का नुकसान हो सकता है। लेकिन अगर मुस्लिम वोटर “टैक्टिकल वोटिंग” अपनाते हैं, तो गठबंधन का प्रभाव सीमित रह जाएगा।

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यह गठबंधन TMC के लिए खतरा और BJP के लिए अप्रत्यक्ष फायदा है। असल तस्वीर 23 और 29 अप्रैल को मतदान और 4 मई को मतगणना के बाद ही साफ होगी।

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