मुर्शिदाबाद। तिलपाड़ा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद मुर्शिदाबाद ज़िले का भरतपुर-1 ब्लॉक बाढ़ की गंभीर चपेट में आ गया है। सबसे अधिक प्रभावित सुखदानपुर गांव है, जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। यहां के लोग नाव और गुड़ पकाने की कड़ाही (लोहे के बड़े बर्तन) का इस्तेमाल कर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
भरतपुर-1 के बीडीओ दावा शेरपा और भरतपुर थाने के ओसी शिवनाथ मंडल ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया और ग्रामीणों से उनकी स्थिति की जानकारी ली।गांव जैसे — श्यामपुर, गड्डा, चांचोआ, बालिचुना, सिंग्हारी, चांदपुर, कोल्ला, जाखीना, छत्तरपुर, इब्राहिमपुर, हमीदपुर और आंगारपुर — इन सभी क्षेत्रों के खेत अब पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं।
- संकट में भी शिक्षा का जज़्बा
बाढ़ के बीच भी कोल्ला गांव की स्कूली छात्राएं यूनिफॉर्म पहनकर पानी पार कर स्कूल जाती दिखीं, जो शिक्षा के प्रति उनका अटूट संकल्प दर्शाता है।
बीडीओ दावा शेरपा ने बताया, “स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित गांवों में राहत सामग्री भेजी जा रही है और राहत शिविर खोले जा रहे हैं।”
कांदी-सालार राज्य सड़क के आंगारपुर बॉक्स ब्रिज के पास संभावित खतरे को देखते हुए पुलिस ने बांस लगाकर, लाल कपड़ा और रेडियम स्टिकर के जरिए चेतावनी संकेत लगाए हैं।

- बिजली-पानी ठप, जीवन कठिन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाढ़ आने के बाद से पिछले तीन दिनों से बिजली और पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद है, जिससे जीवन और कठिन हो गया है।
भरतपुर बीपीएचसी के अंतर्गत गड्डा उप-स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्यकर्मी बाढ़ का पानी पार कर घर-घर जाकर आवश्यक दवाइयाँ पहुँचा रहे हैं।
प्रशासन के राहत प्रयासों के बावजूद ग्रामीण राहत और पुनर्वास कार्यों में और तेजी की मांग कर रहे हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही और ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि उनका जीवन पटरी पर लौट सके।
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