Kolkata: समन के खिलाफ अभिषेक बनर्जी की याचिका का ED ने किया विरोध, CBI को मिली 4 आरोपियों की हिरासत। CBI का मानना ​​​​है कि ईसीएल की परित्यक्त खदानों से अवैध खनन से उत्पन्न घोटाला हजारों करोड़ रुपये का है और अपराध की आय का कुछ हिस्सा हवाला मार्ग से विदेश भेजा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में धन शोधन का केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर कोयले की तस्करी के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को तृणमूल के सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रूजिरा द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका का विरोध किया, जिसमें पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला मामले में एजेंसी द्वारा उन्हें जारी किए गए समन को रद्द करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने मामले में प्रतिवादी, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सुना। दूसरी ओर इस मामले में गिरफ्तार चार लोगों जय देव मंडल, नारायण खरका, गुरुपद माझी और नीरज बरन मंडल को मंगलवार को आसनसोल की अदालत में पेश किया गया है। जहां सीबीआई (CBI) ने हिरासत की अपील की। आसनसोल कोर्ट ने उन्हें सीबीआई हिरासत का निर्देश दिया।

ये चारों कोयला तस्करी के मुख्य सरगना अनूप मांझी और ईसीएल के उन अधिकारियों के करीबी हैं जिन्होंने मिल जुलकर बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी, खनन और तस्करी की थी। उन्हें आज दोपहर आसनसोल में सीबीआई की विशेष अदालत में ले जाया गया। सीबीआई और आरोपी के वकील को सुनने के बाद जज जयश्री बनर्जी ने जयदेव को चार दिन की रिमांड पर भेज दिया। बाकी को सात दिन की हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है।

आरोपी के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल बुलाते ही सीबीआई के सामने पेश हुए। वह जांच में सीबीआई को सहयोग कर रहे हैं, लेकिन सीबीआई ने दावा किया कि आरोपियों ने सहयोग नहीं किया। उनके बयानों और सूचनाओं में भी काफी विसंगति है। इसलिए उन्होंने आरोपी को हिरासत में लेने की अपील की। अंत में सीबीआई की विशेष अदालत ने हामी भर दी। बता दें कि गिरफ्तार किए गए चारों अनूप मांझी उर्फ ​​लाला के करीबी सहयोगी थे।

जिन्हें पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की खदानों से कोयला चोरी और तस्करी के काम में लगाया गया था। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने चारों को कोलकाता में एजेंसी के कार्यालय में अपने अधिकारियों के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया था। संक्षिप्त पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इससे पहले सीबीआई ने मामले में तृणमूल कांग्रेस के युवा नेता बिनय मिश्रा के भाई विकास मिश्रा को गिरफ्तार किया था।

सीबीआई ने पिछले साल नवंबर में तस्करी रैकेट के कथित सरगना लाला, ईसीएल के महाप्रबंधकों अमित कुमार धर और जयेश चंद्र राय, ईसीएल के सुरक्षा प्रमुख तन्मय दास, कुनुस्तोरिया क्षेत्र के सुरक्षा निरीक्षक धनंजय राय और काजोर क्षेत्र की सुरक्षा अधिकारी देवाशीष मुखर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। एजेंसी ने आसनसोल, रानीगंज और कोलकाता में लाला के आधिकारिक परिसरों, आवासों और अन्य संपत्तियों पर छापेमारी की थी।

उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। सीबीआई का मानना ​​​​है कि ईसीएल की परित्यक्त खदानों से अवैध खनन से उत्पन्न घोटाला हजारों करोड़ रुपये का है और अपराध की आय का कुछ हिस्सा हवाला मार्ग से विदेश भेजा गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में धन शोधन का केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

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