कोलकाता | 5 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से मस्जिद शिलान्यास की घोषणा पर जारी विवाद के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला फिलहाल न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं आता, और याचिकाकर्ता को उचित प्रशासनिक मंच पर जाने की सलाह दी।
इस फैसले के बाद टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने साफ कर दिया कि वे 6 दिसंबर को बेल्डंगा में शिलान्यास करेंगे।
🔥 विवाद की पृष्ठभूमि: कबीर की घोषणा से मचा बवाल
भरतपुर के विधायक हुमायूं कबीर ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि—

- वे 6 दिसंबर, यानी बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर,
- मुर्शिदाबाद के बेल्डंगा में ‘बाबरी मस्जिद’ का शिलान्यास करेंगे।
इसके बाद जिले में पोस्टर लगे, जिन्हें बाद में फाड़ दिया गया। यह बयान ऐसे समय आया जब अप्रैल 2025 में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर हुए दंगों की यादें अभी भी ताज़ा हैं।
⚖️ हाईकोर्ट का रुख: ‘अभी हस्तक्षेप का आधार नहीं’
जनहित याचिका में दलील दी गई थी कि यह शिलान्यास कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। लेकिन अदालत ने कहा— यह मामला प्रशासनिक निर्णय से जुड़ा है। अदालत तभी हस्तक्षेप करेगी जब कोई स्पष्ट संवैधानिक उल्लंघन दिखे।
याचिकाकर्ता पहले जिला प्रशासन और राज्य सरकार से संपर्क करें। हाईकोर्ट के इस रुख से प्रशासन पर अब स्थिति संभालने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
🏛️ टीएमसी की कार्रवाई: कबीर निलंबित, पार्टी ने बनाई दूरी
टीएमसी ने बुधवार को कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा— “यह बयान पार्टी की नीति के खिलाफ है।”“टीएमसी सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा नहीं देती। पार्टी ने इसे भाजपा की “ध्रुवीकरण की साजिश” बताया।
🗣️ कबीर का बयान: ‘शिलान्यास तय, नई पार्टी भी बनाऊंगा’
निलंबन के बाद कबीर ने कहा—
- “6 दिसंबर को शिलान्यास होगा, यह मेरा निजी कार्यक्रम है।”
- “22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा करूंगा।”
- “2026 के चुनाव में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारूंगा।”
उनका राजनीतिक इतिहास पहले भी विवादों से भरा रहा है।
🔥 विपक्ष का हमला, भाजपा का आरोप
भाजपा ने इस मुद्दे पर टीएमसी को घेरा।
- पार्टी नेताओं ने इसे “सांप्रदायिक राजनीति का चरम” बताया।
- भाजपा का आरोप है कि टीएमसी ने देर से कार्रवाई की और “वोट बैंक बचाने” की कोशिश की।
राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
✅ 6 दिसंबर पर सबकी निगाहें
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार के बाद अब पूरा मामला प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर आ गया है। 6 दिसंबर को बेल्डंगा में क्या होता है, प्रशासन स्थिति कैसे संभालता है, और राजनीतिक दल इसे कैसे भुनाते हैं— यह आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनेगा।
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