तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। मेदिनीपुर कॉलेज के प्रतिष्ठित विवेकानंद हॉल में आठवां बी.डी. बनर्जी स्मारक व्याख्यान लिखा गया। एक ऐसा अध्याय, जहाँ ज्ञान और संवेदना के संगम ने गूँजती आवाज में कहा -“तकनीक चाहे आकाश छू ले, मानवता का प्रकाश न बुझे।”
मुख्य वक्ता, दुर्गापुर एनआईआईटी के पूर्व अधीक्षक एवं जादवपुर विश्वविद्यालय के राजा रामन्ना चेयर प्रोफेसर डॉ. अनुपम बसु ने अपने मौलिक वक्तव्य में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल यंत्र का नाम नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की परिचायक एक देवदूत है। तकनीक अगर तलवार है तो मनुष्य है उसका विवेकपूर्ण सारथी, जिसके बिना वह अंतहीन अंधकार में खो जाएगी।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के टीचर-इन-चार्ज सत्यरंजन घोष ने हृदयस्पर्शी स्वागतम् भाषण से की, जबकि एलुमनी एसोसिएशन के सामान्य सचिव कुणाल बनर्जी ने उपस्थित सभी को बी.डी. बनर्जी स्मारक व्याख्यान हेतु प्रेरित किया।

बी.डी. बनर्जी के जीवन एवं कर्म को संजोता हुआ प्रोफेसर डॉ. अमल चक्रवर्ती ने उनकी महान छवि को याद दिलाया। परिचय दिया विद्यासागर विश्वविद्यालय के फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर व मेदिनीपुर कॉलेज के भूतपूर्व डॉ. सुरजीत घोष ने।
अंत में, कॉलेज के सत्यरंजन घोष एवं भूतपूर्व कुणाल बनर्जी ने डॉ. बसु को सम्मान स्मारक भेंट कर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज की भूतपूर्व एवं अकादेमिक काउंसिल की मेंबर सेक्रेटरी डॉ. तनुश्री पाल ने एवं सत्र का संचालन मेदिनीपुर कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. सैकत सरकार ने कुशलता पूर्वक किया।
विद्यार्थी-शिक्षक सभागृह से बाहर निकलते समय एक आवाज गूँजती रही, “बिना विवेक के एआई नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के संचालक एआई ही भविष्य की नींव है।”
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