वाराणसी। हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। यह दिन बसंत ऋतु के शुरुआत का भी प्रतीक है। इस दिन ज्ञान, कला एवं संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा का विधान है। कहा जाता है कि इस दिन पूजा-पाठ करने से जीवन के अंधकार का नाश होता है। साथ ही सभी कामों में सफलता मिलती है।
📌 बसंत पंचमी 2026 मुहूर्त : वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को सुबह 02 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 24 जनवरी को सुबह 01 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।
📌 बसंत पंचमी पर विशेष मंत्रों का जाप : इस दिन विद्या और बुद्धि की देवी के आशीर्वाद के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है।

📌 बीज मंत्र : ऐं स्वस्त्यै नमः
इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।
📌 बसंत पंचमी का महत्व : केवल पूजा नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन का संकेत।
📌 बसंत पंचमी सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं है। यह बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी है। इस समय प्रकृति में हरियाली, उल्लास और नई ऊर्जा देखने को मिलती है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले फूलों व पकवानों से मां सरस्वती की पूजा करते हैं।
📌 बसंत पंचमी पर बनाएं ये खास प्रसाद : इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग के पकवान अर्पित किए जाते हैं।
📍खास व्यंजन :
📌 मीठे पीले चावल – केसर, चीनी और सूखे मेवों के साथ बनाया जाता है।
📌 केसर-सूजी का हलवा – घी, सूजी और मेवों से बना स्वादिष्ट हलवा।
📌 बेसन के लड्डू मां सरस्वती को प्रिय है।
📍बसंत पंचमी क्यों है खास?
📌 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माजी ने जब अपने कमंडल से जल छिड़का, तो हाथ में वीणा लिए देवी सरस्वती प्रकट हुईं। इसलिए इस दिन नई विद्या, संगीत और कला की शुरुआत के लिए पूजा की जाती है। यह पर्व भारत, नेपाल और पश्चिमोत्तर बांग्लादेश में धूमधाम से मनाया जाता है।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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