खड़गपुर ब्यूरो | 09 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के सोनामुखी क्षेत्र में दामोदर नदी के किनारे द्वितीय विश्व युद्ध काल का एक पुराना मोर्टार शेल मिलने से स्थानीय लोगों में सनसनी फैल गई है।
स्थानीय निवासियों द्वारा मिट्टी में आंशिक रूप से दबा धातु का संदिग्ध गोला देखे जाने के बाद पुलिस ने तुरंत इलाके को घेराबंदी कर सुरक्षित कर दिया और भारतीय सेना को सूचित किया। मंगलवार सुबह सेना के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया।
घटना की पूरी जानकारी
पुलिस के अनुसार, सोनामुखी थाना क्षेत्र में दामोदर नदी के किनारे कुछ स्थानीय लोगों ने मिट्टी में आंशिक रूप से दबा हुआ धातु का एक गोला देखा। इससे पहले यह किसी की नजर में नहीं आया था।
सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने सोनामुखी थाने को जानकारी दी। पुलिस ने तत्काल क्षेत्र को सील कर दिया और भारतीय सेना को बुलाया। सुबह सेना के अधिकारियों ने मोर्टार शेल और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया।
यह बांकुड़ा में ऐसी पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी द्वारकेश्वर और दामोदर नदी के आसपास विस्फोटकों से भरे कई धातु के गोले बरामद हो चुके हैं। कुछ महीने पहले सोनामुखी थाना क्षेत्र के दिहीपाड़ा इलाके में तीन मोर्टार शेल मिले थे, जिन्हें सेना ने निष्क्रिय किया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पियरडोबा का सैन्य अड्डा
बांकुड़ा क्रिश्चियन कॉलेज में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के प्रभारी प्रोफेसर अरुणाभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बांकुड़ा के पियरडोबा इलाके में ब्रिटिश और अमेरिकी वायुसेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा था।
रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस अड्डे से जापान समेत दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों पर अभियान चलाए जाते थे। प्रोफेसर बंद्योपाध्याय के अनुसार, युद्ध के बाद वहां मौजूद कई हथियार मिट्टी और रेत के नीचे दब गए थे।
समय-समय पर इन मोर्टार शेल की बरामदगी उसी ऐतिहासिक सैन्य गतिविधि की गवाही देती है। यह घटनाएं क्षेत्र के समृद्ध सैन्य इतिहास को रेखांकित करती हैं और स्थानीय प्रशासन तथा सेना की सतर्कता को दर्शाती हैं।
सुरक्षा और पिछले मामले
ऐसे संदिग्ध वस्तुओं के मिलने पर पुलिस और सेना की त्वरित कार्रवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होती है। अक्टूबर 2025 में पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर क्षेत्र में भी द्वितीय विश्व युद्ध का एक बम मिला था, जिसे भारतीय सेना ने सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया था।
उस दौरान हुए नियंत्रित विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के गांवों में भी कंपन महसूस किया गया था।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों में जनता से सहयोग की अपील करती हैं। संदिग्ध वस्तुएं दिखने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें और स्वयं छेड़छाड़ न करें।
आगे की कार्रवाई
सेना द्वारा निरीक्षण के बाद मोर्टार शेल को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। घटना की जांच जारी है।
यह घटना न केवल सुरक्षा चेतावनी है बल्कि बांकुड़ा के युद्धकालीन इतिहास की याद भी दिलाती है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक अपडेट का इंतजार करें।
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