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बांग्लादेश: चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हिंसा; 11 मौतें, 616 घायल

ढाका, 4 फरवरी 2026: बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। आगामी 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले देशभर में राजनीतिक हिंसा में तेजी से इजाफा हुआ है।

जनवरी महीने में हिंसा से जुड़ी घटनाओं में दिसंबर 2025 की तुलना में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र (एएसके) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार:

  • जनवरी में राजनीतिक हिंसा की 75 घटनाएं दर्ज की गईं
  • इनमें 616 लोग घायल हुए
  • 11 लोगों की मौत हुई

दिसंबर 2025 में यह संख्या काफी कम थी:

  • 18 घटनाएं
  • 268 घायल
  • 4 मौतें

Bangladesh unrest

रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 जनवरी को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और प्रचार अभियान शुरू होने के बाद हिंसक झड़पों में और तेजी आई। 21 से 31 जनवरी के बीच अकेले 49 झड़पें हुईं, जिनमें 4 मौतें और 414 घायल हुए।

पत्रकारों पर हमले भी बढ़े

एएसके ने यह भी बताया कि बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है:

  • दिसंबर में ड्यूटी के दौरान 11 पत्रकारों के साथ बाधा या हमले की घटनाएं सामने आईं
  • जनवरी में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार ने यह जानकारी दी।

एएसके की अपील

मानवाधिकार संगठन ने सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने और चुनाव प्रचार के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, कानून प्रवर्तन एजेंसियों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया गया है।

हिंसा के अन्य रूप

पिछले सप्ताह स्थानीय मीडिया ने बताया था कि चुनाव प्रचार शुरू होते ही उम्मीदवारों और कानून व्यवस्था से जुड़े कर्मियों को निशाना बनाकर धमकियों और हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं।

कई निर्वाचन क्षेत्रों में गोलीबारी, चाकूबाजी, तोड़फोड़ और झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा, चुनाव से जुड़ा बुनियादी ढांचा – जैसे कैंप, माइक्रोफोन, कार्यालय, वाहन और मतदान केंद्रों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे – तोड़फोड़ या लूट का शिकार हुए हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

जो दल पहले अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ मिलकर शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को हटाने में शामिल थे, वही अब चुनाव जीतने के लिए आपसी सत्ता संघर्ष में उलझे हुए हैं। इससे चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

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