कोलकाता। पश्चिम बंगाल की बालीगंज विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की उम्मीदवार सायरा शाह हलीम को लगता है कि उनके लिये मुकाबला चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वह इसे जीत लेंगी। माकपा ने आखिरी बार 2001 में दक्षिण कोलकाता की इस प्रतिष्ठित सीट से जीत हासिल की थी और 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बाद तीसरे स्थान पर रही थी। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट से उनके पति फवाद हलीम मैदान में थे।

माकपा उम्मीदवार बनाए जाने से हैरान सायरा हलीम ने कहा, ”हमें कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। मैं जनसभाएं करने के अलावा रोजाना आठ घंटे घर-घर जाकर प्रचार कर रही हूं।” खुद को एक साहित्यकार बताने वाली हलीम को अपने नाम की घोषणा के बाद असम यात्रा की योजना रद्द करनी पड़ी। उन्होंने कहा, ”मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे प्रत्याशी बनाया जाएगा। मैं असम जाने की योजना बना रहा थी …फिर पार्टी नेतृत्व ने मुझसे बात कर उम्मीदवार बनाए जाने के बारे में बताया तो मुझे अपनी टिकट रद्द करने पड़ी।”

हलीम ने कहा कि वह और माकपा कार्यकर्ता हवा का रुख मोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। टीएमसी उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी बताते हुए उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन क्षेत्र के लोग सुप्रियो को भाजपा से टीएमसी में लाने और टिकट देने से खुश नहीं है। नवंबर 2021 में टीएमसी विधायक सुब्रत मुखर्जी का निधन होने के कारण बालीगंज सीट पर उपचुनाव कराये जाने की जरूरत पड़ी है। उपचुनाव के लिये 12 अप्रैल को मतदान होगा।

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