छात्राओं को पुलिस ने दिए सुरक्षा के टिप्स, महिला सुरक्षा और कानूनी अधिकारों की भी दी जानकारी
तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। बाल विवाह पर रोक, बढ़ते साइबर अपराध से बचाव और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पश्चिम मेदिनीपुर जिला पुलिस की ओर से दांतन के रवींद्र भवन में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। दांतन थाना के प्रबंधन में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में पश्चिम मेदिनीपुर की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बुशरा बानो, दांतन थाना प्रभारी सुबीर माझी, बेलदा एसडीओपी सहित पुलिस के कई अधिकारी और केशियाड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक मौजूद रहे। विभिन्न विद्यालयों के प्रधान शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप मिला।
कम उम्र में शादी नहीं, शिक्षा को मिले प्राथमिकता :
शिविर में बाल विवाह के सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के साथ-साथ इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कम उम्र में विवाह किसी लड़की के शिक्षा और बेहतर भविष्य के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकता है।
इसलिए परिवार और समाज दोनों को मिलकर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए आगे आना होगा। छात्राओं को यह भी बताया गया कि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर चुप रहने के बजाय संबंधित प्रशासन या पुलिस को इसकी सूचना देना जरूरी है।
साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील :
कार्यक्रम में साइबर अपराध को लेकर भी छात्राओं को विशेष रूप से जागरूक किया गया। ऑनलाइन ठगी, संदिग्ध लिंक, फर्जी कॉल और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
पुलिस की ओर से छात्राओं से कहा गया कि अनजान लोगों के साथ निजी जानकारी, पासवर्ड, ओटीपी या अन्य संवेदनशील विवरण साझा न करें। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि या ठगी की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल पुलिस अथवा संबंधित प्रशासनिक तंत्र की मदद लें।
सुरक्षा के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार :
महिला सुरक्षा को भी शिविर में प्रमुखता दी गई। छात्राओं को किसी भी प्रकार की धमकी, उत्पीड़न या असुरक्षित स्थिति का सामना होने पर चुप न रहने और तत्काल परिवार, शिक्षक या पुलिस को जानकारी देने की सलाह दी गई। साथ ही उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी लड़की का भविष्य बाल विवाह के कारण नहीं रुकना चाहिए और न ही साइबर अपराध या तकनीक के गलत इस्तेमाल से उसकी सुरक्षा प्रभावित होनी चाहिए। छात्राओं से आत्मविश्वास के साथ अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहने और किसी भी परेशानी में तत्काल सहायता लेने का आह्वान किया गया।
शिविर का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्राओं में ऐसा आत्मविश्वास पैदा करना रहा कि वे अपने अधिकारों को समझें, खतरे को पहचानें और जरूरत पड़ने पर बिना झिझक मदद के लिए आगे आएं।
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