चूरू। हिंदी साहित्य संसद्, – चूरू द्वारा साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु वर्ष 2025 का ‘रामादेवी भागीरथ प्रसाद मरदा स्मृति कोश सम्मान एवं पुरस्कार’ कोलकाता प्रवासी श्री जयकुमार ‘रुसवा’ को प्रदान किया जायेगा। यह सम्मान संस्था द्वारा इस वर्ष हिंदी दिवस 14 सितंबर 2025 को चूरू में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में प्रदान किया जायेगा।
पुरस्कार स्वरूप संस्था द्वारा ₹11000/- नकद राशि, श्री फल, स्वर्ण पदक, सम्मान-पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल आदि अर्पित किए जाते हैं।
संक्षिप्त परिचय –
नाम : श्री जयकुमार ‘रुसवा’
जन्म : 10 अगस्त 1957, रतनगढ़ ( राजस्थान )
शिक्षा : माध्यमिक
प्रवास : 13 वर्ष की अल्पायु में ही उपार्जन हेतु कोलकाता आगमन। जीवन : संघर्ष की पीड़ाएं कविताओं में मुखर हुई तो सन् 1979 से बंगभूमि पर ही अनवरत साहित्य साधना।
विधाएं : कविता, छंद, मुक्तक, दोहे, गीत, गजल, हाईकू, क्षणिकाएं, लघुकथा, कहानी आदि विधाओं में लेखन। परन्तु पहचान हास्य-व्यंग्य कवि के रूप में प्राप्त।
प्रकाशन : देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में पृथक-पृथक विधाओं की लगभग 2500 से अधिक रचनाएं प्रकाशित।
सहयोग स्तर पर छपने वाले सौ से अधिक काव्य-संग्रहों में रचनाएं शामिल।
प्रसारण : आकाशवाणी व दूरदर्शन से समय समय पर रचनाओं का वाचन-अनुवाचन।
उपलब्धि: साहित्य- साधना हेतु देश के कई नगरों के साहित्यिक व सामाजिक संगठनों द्वारा अब तक 52 सम्मान प्राप्त।कतिपय उल्लेखनीय।
चौथी पुस्तक ‘मन की पीर’ (दोहा संग्रह) पर कोलकाता में कविता के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान- ‘काव्य वीणा सम्मान’ मिला। महामहिम राज्यपाल, पश्चिमी बंगाल के कर-कमलों से चार बार सम्मानित।
सम्प्रति- हास्य कवि सम्मेलनों में कविता पाठ, संयोजन तथा संचालन।
संस्था द्वारा श्री जयकुमार ‘रुसवा’ को हार्दिक बधाई एवं मरदा परिवार को अनेका नेक साधुवाद,
बनवारी लाल खामोश अध्यक्ष हिंदी साहित्य संसद्, चूरू
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