कोलकाता न्यूज डेस्क | 12 मई 2026: चुनावी सरगर्मी के बीच अर्चना संस्था ने साहित्य और कविता के माध्यम से आशा, आश्वासन और सकारात्मकता का अनोखा कार्यक्रम आयोजित किया। ‘आश्वासन के बीज’ थीम पर आधारित इस कार्यक्रम में स्वरचित रचनाओं की प्रस्तुति हुई, जिसमें मातृभूमि, जीवन संघर्ष, सामाजिक मूल्य और आशा की किरणों को खूबसूरती से व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की संयोजिका एवं संचालिका इंदू चांडक ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कविता का शब्द चुनावी दौर में भी सकारात्मक संदेश दे सकता है और समाज में आशा का वातावरण तैयार कर सकता है।
प्रमुख कविताओं की प्रस्तुति
- मृदुला कोठारी ने अपनी चर्चित कविता “क्यों गरज रहे हो ए बदरा…” सुनाई और अंत में आश्वासन के बीज बोने वाले मंत्री की प्रतीक्षा का मार्मिक चित्रण किया।
- विद्या भंडारी ने अच्छे चुनाव और सकारात्मक परिणाम की कामना करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की।
- सुशीला चनानी ने “जिंदगी की किताब” और “श्रम की महिमा” पर सुंदर गीत सुनाया।
- शशि कंकानी ने “हिम्मत ना हार, मिलना और बिछड़ना ये हम सबकी नियति हैं” जैसी प्रेरणादायक पंक्तियाँ सुनाईं।
- हिम्मत चौरड़िया (प्रज्ञा) ने कुंडलिया छंद और गीतिका की विशेष प्रस्तुति दी, जिसमें “आग कैसे भी जले अब, दीप जलना चाहिए” जैसी ओजस्वी पंक्तियाँ शामिल थीं।
- भारती मेहता ने युकेलिप्टस के तने और पत्तियों का सुंदर रूपक प्रस्तुत किया।
- मीना दूगड़ ने भौतिकता की चकाचौंध और जीवन की फुर्सत पर गहरी सोच वाली कविता सुनाई।
- चिराग चतुर्वेदी ने ओजस्वी कविता “मैं प्रभात हूं” के माध्यम से जीवन को संघर्ष और परिश्रम का नाम बताते हुए चारों धाम की अवधारणा प्रस्तुत की।
- सुशीला सुराना ने “दिलों की दास्ताँ” और “अभिव्यंजना” पर अपनी रचना सुनाई।
- डॉ. वसुंधरा मिश्र ने “बावरा हुआ ये मन” कविता के माध्यम से भावुक प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन विद्या भंडारी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया। सभी कवियों और प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अर्चना संस्था के इस आयोजन को चुनावी माहौल में साहित्य की सकारात्मक भूमिका का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। कार्यक्रम में कविताओं के माध्यम से समाज को आशा, एकता और सद्भाव का संदेश दिया गया।
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