स्पोर्ट्स डेस्क, कोलकाता | 13 जुलाई 2026: वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) फुटबॉल के लिए वरदान है या अभिशाप, इस पर बहस लगातार तेज होती जा रही है। लेकिन मौजूदा विश्व कप में अर्जेंटीना को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे कहीं अधिक गंभीर हैं।
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अर्जेंटीना को जानबूझकर फायदा पहुंचाया जा रहा है और लियोनेल मेसी की टीम को आगे बढ़ाने के लिए रेफरी और VAR पक्षपातपूर्ण फैसले ले रहे हैं।
इन आरोपों के बीच अब VAR से जुड़े आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने बहस को नया मोड़ दे दिया है।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा “सेटिंग थ्योरी”
सोशल मीडिया पर यह “सेटिंग थ्योरी” लगातार ट्रेंड कर रही है। सेमीफाइनल की चार टीमें तय होने के बाद विवाद और भी बढ़ गया। हालांकि भावनाओं से अलग यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार VAR से सबसे अधिक फायदा पाने वाली टीम अर्जेंटीना नहीं, बल्कि मेजबान मेक्सिको रही है।
क्या कहते हैं आकड़े?
नॉर्थईस्टर्न ग्लोबल न्यूज के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रुप चरण से लेकर प्री-क्वार्टर फाइनल तक प्रति 100 फाउल पर VAR हस्तक्षेप की दर मेक्सिको के पक्ष में 7.8 रही, जबकि अर्जेंटीना के लिए यह आंकड़ा 6.7 दर्ज किया गया।
इस सूची में पुर्तगाल (4.6), न्यूजीलैंड (4.2) और सऊदी अरब (3.6) क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।
हालांकि एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि इस अवधि में अर्जेंटीना के खिलाफ VAR का एक भी फैसला नहीं गया। यही वजह है कि विरोधी टीमें और फुटबॉल प्रशंसकों का एक वर्ग निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।
क्रोएशिया पर पड़ा नकारात्मक प्रभाव
दूसरी ओर VAR का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव क्रोएशिया पर पड़ा। 2018 विश्व कप की उपविजेता टीम को इस टूर्नामेंट में VAR से एक भी सकारात्मक फैसला नहीं मिला, जबकि उसके खिलाफ प्रति 100 फाउल पर 6.5 बार हस्तक्षेप हुआ। इसके बाद ईरान (5.4), कतर (5.1), जर्मनी (4.0) और इंग्लैंड (3.5) का स्थान रहा।
मिस्र के मुख्य कोच जताई थी नाराजगी
अर्जेंटीना के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल में हार के बाद मिस्र के मुख्य कोच होसाम हसन ने रेफरिंग पर खुलकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या सोचता है। मैं यहां सच बोलने आया हूं। हमारे साथ अन्याय हुआ है और हमें न्याय नहीं मिला।”
इसके बाद मिस्र फुटबॉल संघ ने रेफरी के फैसलों को लेकर फीफा में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई।
हालांकि फीफा के मुख्य रेफरिंग अधिकारी पियरलुइगी कोलीना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि बिना ठोस आधार के रेफरियों पर पक्षपात का आरोप नहीं लगाया जा सकता और सभी फैसलों की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है।
फीफा के “Mistaken Identity” नियम
इसी बीच इस विश्व कप में फीफा के नए “Mistaken Identity” नियम के तहत पहला रेड कार्ड भी देखने को मिला। स्विट्जरलैंड के स्ट्राइकर ब्रिल एम्बोलो को 71वें मिनट में दूसरे पीले कार्ड के बाद मैदान छोड़ना पड़ा। इस फैसले पर स्विस टीम ने भी कड़ी आपत्ति जताई।
मैच के बाद स्विट्जरलैंड के कोच मुरात याकिन ने कहा, “यह फैसला समझ से परे है। मुझे पता है कि फीफा हमेशा रेफरियों का बचाव करेगा, लेकिन इस निर्णय ने मैच का रुख बदल दिया।”
इसी बीच अल्जीरिया के खिलाफ मुकाबले में लियोनेल मेसी के एक स्टड्स-अप टैकल को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया।
कई पूर्व खिलाड़ियों और प्रशंसकों का मानना है कि उस चुनौती पर मेसी को रेड कार्ड मिलना चाहिए था, लेकिन रेफरी ने उन्हें पीला कार्ड तक नहीं दिखाया। यही घटनाएं अर्जेंटीना और VAR को लेकर उठ रहे सवालों को लगातार हवा दे रही हैं।
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